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सुग्रीव किला में पुण्यस्मरण पर विशाल भंडारा, संत समाज और भक्तों की उमड़ी आस्था

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और पूजन के साथ हुई। इसके पश्चात आयोजित विशाल भंडारे में सैकड़ों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति की ओर से सभी आगंतुकों का विधिवत स्वागत किया गया तथा प्रसाद और पेयजल की समुचित व्यवस्था की गई।

विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य के जीवन और योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अपने आध्यात्मिक प्रभाव और संगठन कौशल से सुग्रीव किला को विशिष्ट पहचान दिलाई। वर्ष 1987 में माता सीता सहित भगवान श्रीराम के नवीन विग्रह की स्थापना कर उन्होंने इस प्राचीन धाम को आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया। मंदिर आंदोलन के समय भी सुग्रीव किला संतों की गतिविधियों का अहम केंद्र रहा।

समारोह में उपस्थित संत-महात्माओं ने उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प व्यक्त किया। पुण्यतिथि के अवसर पर सुग्रीव किला परिसर में दिनभर भक्ति, श्रद्धा और सेवा का भाव वातावरण में परिलक्षित होता रहा।

अखिलेश यादव का योगी के जापान दौरे पर तंज, कहा – काशी क्यों नहीं बनी क्योटो जैसी

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 22 फरवरी से विदेश दौरे पर रवाना होंगे। उनका यह दौरा सिंगापुर और जापान के लिए है, जिसमें वे प्रदेश में निवेश के अवसर तलाशेंगे। इस दौरे को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसा है।

अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि मुख्यमंत्री को जापान में क्योटो ज़रूर जाना चाहिए ताकि वे समझ सकें कि वाराणसी क्योटो जैसी क्यों नहीं बन पाई। उन्होंने कहा कि यह दौरा शहरों की विरासत और विकास की सीख लेने का मौका है, और इसे सिर्फ निजी भ्रमण नहीं बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा, “सीएम योगी अपने कार्यकाल के अंतिम साल में मनसुख-टूरिज्म कर रहे हैं। अब जबकि उनके कार्यकाल का आखिरी साल है, कोई वास्तविक योजना बनाने की उम्मीद करना मुश्किल है। यह दौरा व्यक्तिगत लाभ के बजाय जनता के लिए भी उपयोगी होना चाहिए।”

22 से 27 फरवरी तक जापान और सिंगापुर में रहेंगे सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 22 फरवरी से 27 फरवरी तक जापान और सिंगापुर दौरे पर रहेंगे। जापान में वे उच्च गति वाली मैग्लेव ट्रेन का परीक्षण करेंगे। यह ट्रेन चुंबकीय शक्ति के सहारे पटरी से ऊपर हवा में चलती है और 600 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक पहुँच सकती है। इसके माध्यम से टोक्यो और नागोया के बीच यात्रा समय आधे से भी कम हो जाएगा।

इस दौरे में उनके साथ वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और निवेश प्रमोटर मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री 23 और 24 फरवरी को सिंगापुर में और 24, 25 व 26 फरवरी को जापान में उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ बैठकें करेंगे।

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इन यात्राओं में मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी, सचिव मुख्यमंत्री अमित सिंह व ओसडी मुख्यमंत्री आरबीएस रावत के अलावा औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव श्रम डा.एमके शन्मुगा सुन्दरम, प्रमुख सचिव पर्यटन अमृत अभिजात, इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरन आनन्द, यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह व यूपीनेडा के निदेशक इन्द्रजीत सिंह भी शामिल रहेंगे।

चच्चू का प्रभाव भी आप पर आ गया, यूपी विधानसभा में सीएम योगी का विपक्ष पर तंज,शिवपाल यादव पर भी ली चुटकी

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष और समाजवादी नेता शिवपाल यादव पर तंज कसा। सीएम ने नेता विपक्ष माता प्रसाद पांडेय को धन्यवाद देते हुए उनके सरल और मिलनसार स्वभाव की सराहना की।

सीएम योगी ने कहा कि पांडेय समाजवादी आंदोलन की पुरानी पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं, जिन्होंने अपने जीवन में समाजवादी विचारों का पालन किया। इसके साथ ही उन्होंने शिवपाल यादव का उदाहरण देते हुए कहा, “कभी-कभी संगत का प्रभाव भी पड़ जाता है। चच्चू का प्रभाव आप पर भी आ गया है। शिवपाल का श्राप माता प्रसाद जी को ना लगे, यही मेरी कामना है।”

इस अवसर पर सीएम योगी ने कवि सुमित्रानंदन पंत की एक कविता भी पढ़ी, जिसमें वीरों और उनके सम्मान का वर्णन किया गया।

रोजगार और विकास पर जोर

सीएम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि “जब रोजगार मिलता है तो विकास होता है। 2017 से पहले निवेश की संभावना बहुत कम थी, क्योंकि सपा के शासन में डर का माहौल था। हमारे शासन में जाति के आधार पर नहीं बल्कि विकास पर ध्यान दिया गया।”

उन्होंने बताया कि प्रदेश की सरकारी आय 2017 में लगभग 43 हजार करोड़ रुपये थी, जो अब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। साथ ही उन्होंने कर्ज अनुपात को 27 प्रतिशत से घटाकर 23 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य बताया।

यूपी अब देश के शीर्ष राज्यों में

योगी ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश को देश के पिछड़े राज्यों में गिना जाता था, लेकिन अब यह प्रदेश देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है। उनका लक्ष्य है कि 2026-27 तक प्रदेश की जीडीपी 40 लाख करोड़ रुपये पार करे।

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सीएम ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में प्रदेश की छवि इतनी खराब थी कि बाहर से आए लोगों को होटल में कमरे तक नहीं मिलते थे, जबकि अब उत्तर प्रदेश के लोगों को पूरे देश में सम्मान मिल रहा है।

वित्तीय सुधार और निवेश

सीएम योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने भ्रष्टाचार रोककर और सरकारी धन के लीकेज को कम करके वित्तीय स्थिति को मजबूत किया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश ने भारतीय रिजर्व बैंक की सभी गाइडलाइंस का पालन किया है। 2026 में प्रदेश का पूंजीगत व्यय बढ़कर 1 लाख 77 हजार करोड़ रुपये हो गया है।

सीएम ने यह भी कहा कि प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जो रोजगार और आर्थिक विकास की मजबूत आधारशिला हैं।

जाति-जाति का शोर मचाते केवल कायर, क्रूर…यूपी विधानसभा में दिनकर की कविता से सियासी वार, CM योगी का सपा पर हमला

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मशहूर कवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता सुनाकर समाजवादी पार्टी पर तीखा तंज कसा। सदन में बोलते हुए सीएम ने पंक्तियां पढ़ीं— “मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का, वीरों का… जाति-जाति का शोर मचाते केवल कायर, क्रूर।”

सीएम ने कहा कि उनकी सरकार जाति के आधार पर नहीं, बल्कि विकास और सुशासन के आधार पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री को 10वां बजट प्रस्तुत करने का अवसर मिला है।

सपा पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री ने सपा सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि पहले इंसेफेलाइटिस से हर साल 1500 से 1700 तक एससी-एसटी वर्ग के बच्चों की मौत होती थी, लेकिन 2019 के बाद से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कभी जाति नहीं देखी, बल्कि सभी वर्गों के लिए काम किया।

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इस दौरान उन्होंने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और सपा नेता शिवपाल सिंह यादव पर भी कटाक्ष किया। योगी ने कहा कि कुछ जिलों की पहचान ऐसी बना दी गई थी कि लोग वहां के नाम से ही दूरी बना लेते थे, लेकिन अब प्रदेश की छवि बदली है।

निजी विश्वविद्यालयों पर छिड़ी बहस

वहीं, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने ग्रेटर नोएडा स्थित गल्गोटियास विश्वविद्यालय को लेकर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों की फीस संरचना पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि शिक्षा के नाम पर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उनके बयान पर सदन में हल्के ठहाके भी लगे।

सदन में हल्का-फुल्का माहौल

रोजगार और राजस्व संहिता पर चर्चा के दौरान माता प्रसाद पांडेय ने मुस्कुराते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री को प्रसन्न रहना चाहिए, क्योंकि झंझावात बहुत हैं।” इस पर सदन में कुछ देर के लिए सहज और हल्का माहौल देखने को मिला।

बजट सत्र के अंतिम दिन कविता, कटाक्ष और आंकड़ों के जरिए सियासी गर्मी अपने चरम पर रही। अब देखना यह होगा कि इस बहस का राजनीतिक असर आगे किस रूप में सामने आता है।

यूनुस की रवानगी होते ही बांग्लादेश–भारत संबंधों में नरमी, तारिक रहमान सरकार का बड़ा फैसला

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- बांग्लादेश की नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। मोहम्मद यूनुस की रवानगी के बाद बनी तारिक रहमान की सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए नई दिल्ली स्थित अपने हाई कमीशन में भारतीय नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं दोबारा शुरू कर दी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार सुबह से सभी श्रेणियों की वीजा सेवाएं बहाल कर दी गईं।

सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि दिसंबर में डिप्लोमैटिक तनाव के चलते दोनों देशों के बीच वीजा और कांसुलर सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी गई थीं। हालांकि उस दौरान बिजनेस और वर्क वीजा को पूरी तरह बंद नहीं किया गया था। अब बांग्लादेश हाई कमीशन ने सभी कैटेगरी की सेवाएं फिर से चालू कर दी हैं।

भारत भी उठा सकता है कदम

संकेत मिल रहे हैं कि भारत भी बांग्लादेशी नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं जल्द बहाल कर सकता है। भारतीय अधिकारियों ने हाल ही में कहा था कि इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो दोनों देशों के बीच आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।

तनाव की पृष्ठभूमि

पिछले वर्ष दिसंबर में डिप्लोमैटिक तनाव उस समय बढ़ गया था, जब बांग्लादेश में भारत विरोधी बयानबाजी करने वाले शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के बाद हालात बिगड़ गए थे। इसके बाद बांग्लादेश के कई हिस्सों में भारत विरोधी प्रदर्शन हुए। चटगांव में स्थित भारतीय सहायक उच्चायोग के बाहर प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया और पथराव की घटनाएं भी सामने आईं। सुरक्षा कारणों से 21 दिसंबर से इंडियन वीजा एप्लीकेशन सेंटर (IVAC) का कामकाज अगली सूचना तक रोक दिया गया था।

संबंधों में सुधार की उम्मीद

विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार के कार्यभार संभालने के बाद दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में नई शुरुआत हो सकती है। व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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फिलहाल वीजा सेवाओं की बहाली को कूटनीतिक संबंधों में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश आपसी विश्वास को किस हद तक मजबूत कर पाते हैं।

पता नहीं कहां से कुत्ता ले आए…उत्तर प्रदेश विधानसभा में गरमाई बहस, नेता प्रतिपक्ष का सरकार पर तंज

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में उस वक्त ठहाके गूंज उठे, जब नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार पर तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने उच्च शिक्षा के मुद्दे को उठाते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित गल्गोटियास विश्वविद्यालय पर निशाना साधा और कहा, “पता नहीं कहां से कुत्ता ले आए और कह दिया कि हमने बनाया है।” उनके इस बयान के बाद सदन में हल्की हंसी और शोरगुल का माहौल बन गया।

निजी विश्वविद्यालयों पर उठाए सवाल

माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय फीस लेता है, लेकिन निजी विश्वविद्यालयों में फीस संरचना काफी अधिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना शिक्षा के विस्तार के लिए नहीं, बल्कि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने याद दिलाया कि जब ऐसे विश्वविद्यालयों को मान्यता देने का विधेयक आया था, तब उन्होंने इसका विरोध किया था।

मुख्यमंत्री से हल्की नोकझोंक

बहस के दौरान उन्होंने राजस्व संहिता का जिक्र करते हुए कहा कि इसके निर्माण में शिवपाल सिंह यादव की भी भूमिका रही है।

इसी दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर मुस्कुराते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री को प्रसन्न रहना चाहिए, क्योंकि झंझावात बहुत हैं।” इस पर सदन का माहौल कुछ देर के लिए हल्का हो गया।

वित्तीय प्रबंधन और कर्ज पर हमला

नेता प्रतिपक्ष ने राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सरकार को घेरा। उनका दावा था कि प्रदेश पर नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है और बजट में वास्तविक वित्तीय स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही। इस पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने आपत्ति भी जताई।

स्वास्थ्य और शिक्षा पर चिंता

माता प्रसाद पांडेय ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिला अस्पतालों से मरीजों को बड़े संस्थानों में रेफर करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने डॉक्टरों की कमी, दवाओं की अनुपलब्धता और आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर चिंता जताई।

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साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों—जैसे इकाना स्टेडियम, लोक भवन और पुलिस मुख्यालय—का उल्लेख करते हुए वर्तमान सरकार को एक्सप्रेसवे के अलावा अन्य बड़े विकास कार्य गिनाने की चुनौती दी।

बजट सत्र के दौरान चली इस बहस ने शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय प्रबंधन जैसे मुद्दों को फिर से राजनीतिक केंद्र में ला दिया है।

उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों के लिए बड़ा फैसला: 1 अप्रैल से बढ़ेगा मानदेय

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों के लिए बड़ा ऐलान किया है। राज्य विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने 20 फरवरी को सदन में कहा कि 1 अप्रैल से शिक्षामित्रों को 18,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। अभी तक उन्हें 10,000 रुपये प्रति माह मिलते थे।

सरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षामित्रों को सीधा लाभ मिलेगा। ये सभी शिक्षामित्र संविदा पर कार्यरत हैं और लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे। मानदेय वृद्धि के साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि शिक्षामित्रों को अब 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

अनुदेशकों के लिए भी राहत

मुख्यमंत्री ने केवल शिक्षामित्रों के लिए ही नहीं, बल्कि अनुदेशकों के लिए भी अहम घोषणा की। अब प्रदेश के लगभग 28 हजार अनुदेशकों को 17,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। इसे शिक्षा विभाग से जुड़े संविदा कर्मियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

सदन में राजनीतिक तंज भी चर्चा में

बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री का एक बयान भी चर्चा का विषय बन गया। विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, “माता प्रसाद पांडेय को शिवपाल का श्राप न लगे…”। इस टिप्पणी को लेकर सदन में कुछ देर के लिए हलचल रही। मुख्यमंत्री का यह बयान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव के संदर्भ में माना जा रहा है।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार का यह फैसला अहम हो सकता है। बड़ी संख्या में शिक्षामित्र और अनुदेशक प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कार्यरत हैं, ऐसे में यह घोषणा राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि बढ़ा हुआ मानदेय और स्वास्थ्य सुविधा का लाभ जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से लागू होता है।

भारत मंडपम में AI समिट के दौरान हंगामा, यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में चल रहे अंतरराष्ट्रीय एआई समिट के दौरान शुक्रवार को अचानक हंगामा खड़ा हो गया। कार्यक्रम के बीच यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता शर्टलेस होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उस समय मंच पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य को लेकर चर्चा जारी थी, लेकिन अचानक माहौल विरोध-प्रदर्शन में बदल गया।

‘ठंड’ का लिया सहारा, अंदर पहनकर लाए टी-शर्ट

जानकारी के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने सर्द मौसम का फायदा उठाया। वे ‘PM IS COMPROMISED’ लिखी सफेद टी-शर्ट पहनकर आए थे, लेकिन ऊपर से स्वेटर और जैकेट डाल रखी थी। सुरक्षा जांच के दौरान टी-शर्ट नजर नहीं आई और वे सामान्य प्रतिभागियों की तरह अंदर प्रवेश कर गए।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए मिली एंट्री

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त देवेश कुमार महला ने बताया कि आरोपियों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया था और क्यूआर कोड के माध्यम से प्रवेश पाया। करीब साढ़े 12 बजे वे हॉल नंबर 5 के पास पहुंचे और स्वेटर-जैकेट उतारकर टी-शर्ट लहराते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया।

पुलिस के अनुसार आम प्रतिभागियों के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था थी, जिसका उपयोग करते हुए ये लोग कार्यक्रम स्थल में दाखिल हुए। फिलहाल चार लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि अन्य की पहचान की जा रही है। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में करीब 8-10 कार्यकर्ता प्रदर्शन करते दिखाई दे रहे हैं।

यूथ कांग्रेस का पक्ष

भारतीय युवा कांग्रेस ने इस विरोध को अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते के खिलाफ बताया है। संगठन के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि प्रदर्शन एआई समिट के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों के विरोध में था। उनके मुताबिक किसानों और युवाओं के हितों की अनदेखी के खिलाफ यह प्रतीकात्मक विरोध किया गया।

सुरक्षा पर उठे सवाल

घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि इतने हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय आयोजन में प्रदर्शनकारी कैसे प्रवेश कर गए। हालांकि पुलिस का कहना है कि सभी ने वैध रजिस्ट्रेशन के आधार पर प्रवेश किया था और मामले की जांच की जा रही है।

इस घटना ने राजधानी में आयोजित बड़े आयोजनों की सुरक्षा प्रणाली पर बहस छेड़ दी है।

अयोध्या में मिनी महाराष्ट्र: 19 फरवरी से होगा ज्ञानेश्वरी पारायण एवं अखंड हरिनाम महोत्सव

अयोध्या/सर्वोदय न्यूज़:- रामलला की नगरी अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र में 19 फरवरी 2026 से 26 फरवरी 2026 तक एक भव्य धार्मिक समागम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर संत श्री ज्ञानेश्वर महाराज की 700वीं स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में ‘ग्रंथराज श्री ज्ञानेश्वरी पारायण एवं अखंड हरिनाम महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। बालयोगी श्री सदानंद महाराज के मार्गदर्शन में यह आयोजन महाराष्ट्र की वारकरी परंपरा और उत्तर प्रदेश की भक्ति संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा।

मुख्यमंत्री और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति

महोत्सव का भव्य शुभारंभ 19 फरवरी सुबह 8:00 बजे श्री रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के सचिव चंपतराय जी द्वारा किया जाएगा। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, पूर्व राज्यपाल राम नाईक और कई केंद्रीय एवं राज्य मंत्रियों तथा सांसदों की उपस्थिति भी सुनिश्चित है।

भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रम

महोत्सव के दौरान प्रतिदिन आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। सुबह 5:00 बजे से काकड़ा आरती, 7:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक श्री ज्ञानेश्वरी पारायण होगा। दोपहर 3:00 बजे से 5:00 बजे तक संत एकनाथ महाराज के 14वें वंशज श्री योगीराज महाराज गोसावी द्वारा भावार्थ रामायण कथा प्रस्तुत की जाएगी। शाम 5:30 बजे से 6:30 बजे तक राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य स्वामी श्री गोविंददेवगिरी जी महाराज द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज चरित्र कथा सुनाई जाएगी। इसके पश्चात रात्रि में कीर्तन का आयोजन होगा।

सांस्कृतिक आकर्षण और दीपोत्सव

24 फरवरी को विशेष संत पूजन आयोजित किया जाएगा। वहीं रात्रि में मणिपुर के कलाकारों द्वारा वसंत रासलीला की प्रस्तुति दी जाएगी। महोत्सव की भव्य समाप्ति 25 फरवरी की शाम को आयोजित दीपोत्सव के माध्यम से होगी, जो पूरी अयोध्या को भक्तिमय प्रकाश से रोशन कर देगा।

आयोजक समिति की अपील

कार्यक्रम के निमंत्रक और श्रीमती सुभद्रा तिवारी महाविद्यालय (कूरेभार) के प्रबंधक राममूर्ति तिवारी ने बताया कि इस महोत्सव में देश के ख्यातिलब्ध संत, महंत और कीर्तनकार सम्मिलित होंगे। आयोजक समिति ने समस्त राम भक्तों और श्रद्धालुओं से इस पावन अवसर में सहभागी होने की विशेष अपील की है।

यह महोत्सव अयोध्या और महाराष्ट्र की भक्ति परंपरा का अद्वितीय संगम होगा और इसे ‘मिनी महाराष्ट्र’ के रूप में देखा जा रहा है।

यूपी में तेज हुई ब्राह्मण सियासत,ब्रजेश पाठक के बटुक पूजन के बाद अब राजभर का दांव; विपक्ष भी…

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘प्रबुद्ध वर्ग’ यानी ब्राह्मण मतदाता एक बार फिर केंद्र में आ गए हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सूबे की सियासत में ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की खुली कवायद शुरू हो चुकी है। हालिया ‘शिखा विवाद’ के बाद यह राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है, जो अब धार्मिक आयोजनों, रैलियों और सार्वजनिक संदेशों के जरिए दिखाई दे रही है।

ब्रजेश पाठक का बटुक पूजन

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने प्रयागराज माघ मेले में ब्राह्मण बटुकों की चोटी खींचे जाने की घटना को ‘महापाप’ बताते हुए कड़ा रुख अपनाया। इसके बाद उन्होंने अपने सरकारी आवास पर बटुकों को आमंत्रित कर विधि-विधान से पूजन किया, उनके पैर पखारे और आशीर्वाद लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ब्राह्मण समाज में उपजे असंतोष को शांत करने के लिए ‘डैमेज कंट्रोल’ की रणनीति का हिस्सा है।

ओपी राजभर का ‘प्रबुद्ध’ दांव

ब्रजेश पाठक की पहल के बाद सुभासपा प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। आजमगढ़ में प्रस्तावित ‘सामाजिक समरसता रैली’ में उन्होंने बड़ी संख्या में प्रबुद्ध ब्राह्मणों को आमंत्रित किया है। इसे राजभर के सामाजिक आधार को विस्तारित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे वे पिछड़ों के साथ-साथ सवर्ण मतदाताओं में भी पैठ बना सकें।

मायावती का 2007 वाला फॉर्मूला

बसपा प्रमुख मायावती ने भी ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की खुली अपील की है। उन्होंने 2007 के ‘दलित-ब्राह्मण सोशल इंजीनियरिंग’ मॉडल की याद दिलाते हुए भरोसा दिलाया कि उनके शासन में ब्राह्मणों का सम्मान सुरक्षित रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा के जरिए एक बार फिर वही समीकरण मजबूत करने की कोशिश दिख रही है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव का हमला

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव लगातार योगी सरकार पर ब्राह्मणों की उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं। वे पूर्वांचल की घटनाओं और कुछ चर्चित मामलों का हवाला देकर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि भाजपा शासन में ब्राह्मण समाज असुरक्षित महसूस कर रहा है।

अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा

इस बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने ब्राह्मण सम्मान के मुद्दे पर पद छोड़ने और नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की है।

कुल मिलाकर, प्रदेश की लगभग 12-13 प्रतिशत आबादी वाला ब्राह्मण समाज एक बार फिर सत्ता की राजनीति का केंद्र बन गया है। अब देखना यह है कि 2027 की राह में कौन-सा दल इस सामाजिक समीकरण को अपने पक्ष में मोड़ पाता है।