Sunday, May 24, 2026

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MRP व्यवस्था में बदलाव की मांग: अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने उठाए बड़े सवाल, सरकार से नए कानून की अपील

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:-  Akhil Bharatiya Grahak Panchayat (ABGP) ने अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) व्यवस्था को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया है। संगठन ने आरोप लगाया है कि वर्तमान व्यवस्था में निर्माता कंपनियां मनमाने तरीके से MRP तय कर रही हैं, जिसका सीधा नुकसान उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है। संगठन ने केंद्र सरकार से MRP प्रणाली में व्यापक सुधार और नया कानून बनाने की मांग की है।

53 वर्षों से उपभोक्ता हित में काम कर रहा ABGP

अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत एक गैर-सरकारी संगठन है, जो पिछले 53 वर्षों से उपभोक्ता जागरूकता, उपभोक्ता शिक्षण और उपभोक्ता अधिकारों के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। संगठन का दावा है कि देशभर में उसके 35 हजार से अधिक सदस्य सक्रिय हैं।

मई महीने में संगठन की ओर से पूरे देश में MRP जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें उपभोक्ताओं को अधिकतम खुदरा मूल्य से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

ABGP ने उठाईं ये प्रमुख मांगें

संगठन ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से—

  • उत्पाद पर उत्पादन लागत का उल्लेख अनिवार्य किया जाए।
  • फर्स्ट सेल प्राइस यानी जिस कीमत पर GST चुकाया गया है, उसे भी दर्शाया जाए।
  • भ्रामक डिस्काउंट और फर्जी छूट पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं।
  • MRP तय करने की अधिकतम सीमा निर्धारित करने वाला कानून बनाया जाए।

मेडिकल सेक्टर में भारी मार्जिन का आरोप

ABGP ने विशेष रूप से दवा और मेडिकल उपकरणों के क्षेत्र में अत्यधिक MRP का मुद्दा उठाया। संगठन का कहना है कि कई मामलों में उत्पादों का MRP उत्पादन लागत से कई गुना ज्यादा होता है।

संगठन ने दावा किया कि—

  • 3 रुपये की सुई 30 रुपये तक में बेची जाती है।
  • 25 हजार रुपये में आयात किया गया पेसमेकर 2 लाख रुपये तक सूचीबद्ध किया जाता है।
  • 4 लाख रुपये के हार्ट वाल्व का MRP 26 लाख रुपये तक पहुंच जाता है।
  • 5 से 16 रुपये लागत वाले स्टॉपकॉक 95 से 136 रुपये तक में बेचे जाते हैं।

ऑनलाइन और मॉल की कीमतों पर भी सवाल

संगठन ने कहा कि ब्रांडेड उत्पाद शॉपिंग मॉल में काफी महंगे दाम पर बेचे जाते हैं, जबकि वही सामान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आधी कीमत में उपलब्ध रहता है। इससे उपभोक्ता भ्रमित होते हैं और कई बार नकली या डुप्लीकेट उत्पाद खरीदने का खतरा भी बढ़ जाता है।

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ABGP का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में “MRP निर्माता नियंत्रित” है, यानी कंपनियां अपनी मर्जी से मूल्य तय कर रही हैं और उपभोक्ता को इसकी वास्तविक लागत या संरचना की जानकारी नहीं मिलती।

सरकार से स्वतंत्र प्राधिकरण बनाने की मांग

संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि—

  1. MRP व्यवस्था को पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी बनाने के लिए नया कानून बनाया जाए।
  2. एक स्वतंत्र प्राधिकरण, बोर्ड या आयोग गठित किया जाए, जो MRP नियमों की निगरानी कर सके।
  3. मौजूदा कानूनों में संशोधन कर उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए Pramod Pandey ने कहा कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए MRP व्यवस्था में सुधार बेहद जरूरी है।

इस दौरान संगठन के कई पदाधिकारी भी मौजूद रहे, जिनमें यशपाल सिंह, ओमकार पांडेय,लक्ष्मी कान्त पाण्डेय, डॉ. राम प्रताप सिंह बिसेन, आशुतोष मिश्रा, रमा शंकर अवस्थी और विश्वनाथ मिश्रा सहित अन्य सदस्य एवं पदाधिकारी  शामिल रहे।

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