स्पोर्ट्स डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- मैनचेस्टर टेस्ट के दूसरे दिन टीम इंडिया के विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ऋषभ पंत ने फ्रैक्चर के बावजूद मैदान में उतरकर जज़्बे की मिसाल पेश की। जैसे ही वह क्रीज़ पर पहुंचे, दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट और स्टैंडिंग ओवेशन से उनका स्वागत किया। इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने भी पंत के हौंसले को सराहा, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया।
मैच के दौरान स्टोक्स ने बार-बार पंत के उसी पैर को निशाना बनाते हुए यॉर्कर गेंदें फेंकी, जिसमें चोट थी। जोफ्रा आर्चर ने भी यही रणनीति अपनाई। हालांकि, दर्द के बावजूद पंत डटे रहे और एक छक्के सहित 54 रनों की जुझारू पारी खेली।
सोशल मीडिया पर स्टोक्स की इस रणनीति को लेकर जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। फैंस और क्रिकेट प्रेमियों ने इसे ‘खेल भावना’ के खिलाफ बताया और सवाल उठाए कि क्या किसी खिलाड़ी को आउट करने के लिए उसकी चोट को निशाना बनाना जरूरी है?
पूर्व क्रिकेटर पार्थिव पटेल के कुछ दिन पहले दिए बयान की भी चर्चा होने लगी, जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ टीमें खेल भावना को अपनी सुविधा के अनुसार परिभाषित करती हैं — और इंग्लैंड का उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया था।
मैच की बात करें तो भारत ने पहली पारी में 358 रन बनाए, जिसमें यशस्वी जायसवाल, साई सुदर्शन और ऋषभ पंत ने अर्धशतक जमाए। जवाब में इंग्लैंड ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक 2 विकेट पर 225 रन बना लिए थे। जैक क्रॉली और बेन डकेट ने पहले विकेट के लिए 166 रन की मजबूत साझेदारी की, हालांकि दोनों शतक से चूक गए।
अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या इंग्लैंड की टीम ‘जेंटलमेन गेम’ की गरिमा बनाए रख पाएगी या फिर इस विवाद के बाद क्रिकेट में खेल भावना को लेकर नई बहस छिड़ेगी।



