न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयकों पर चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah और समाजवादी पार्टी के नेता Akhilesh Yadav के बीच तीखी नोकझोंक चर्चा का केंद्र रही।
आरक्षण को लेकर क्या है विवाद?
महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की योजना है, जिसे 2029 के आम चुनाव से लागू करने की तैयारी है। इस पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने मांग उठाई कि ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए भी अलग प्रावधान किया जाए।
अमित शाह का जवाब
इस मांग पर जवाब देते हुए Amit Shah ने कहा कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है, इसलिए सरकार इस तरह के किसी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि समाजवादी पार्टी चाहती है तो अपने सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है।
जनगणना और जाति पर बहस
अखिलेश यादव ने यह भी सवाल उठाया कि बिना नई जनगणना और जातीय आंकड़ों के आरक्षण लागू करने की जल्दबाजी क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले जनगणना कराई जाए और उसके आधार पर निर्णय लिया जाए।
इस पर अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल घरों की गिनती की जा रही है और जब व्यक्तियों की गिनती होगी, तब जाति का कॉलम शामिल किया जाएगा। उन्होंने सपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर उनके बस में हो, तो वे घरों की भी जाति तय कर दें।
विपक्ष के आरोप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार इस विधेयक को जल्दबाजी में इसलिए पास करना चाहती है ताकि भविष्य में आने वाले जातिगत आंकड़ों के आधार पर आरक्षण की मांगों से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि ओबीसी और दलित वर्ग की वास्तविक आबादी सामने आने के बाद उनके हिस्से के आरक्षण की मांग और तेज होगी।
इस दौरान सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी सवाल उठाया कि विधेयक में ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग प्रावधान क्यों नहीं किया गया है।



