न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि जो भी हथियार उठाकर हिंसा करेगा, उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट आएं।
“सरेंडर करने वालों के लिए रेड कार्पेट”
लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का स्वागत करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि जो लोग हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं, उनके लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। लेकिन जो निर्दोष लोगों पर हमले करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है।
विचारधारा को बताया मूल कारण
अमित शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद का कारण केवल गरीबी या पिछड़ापन नहीं, बल्कि एक विशेष विचारधारा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है और “अन्याय” के नाम पर हथियार उठाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
विकास और सुरक्षा—दोनों पर जोर
उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास के साथ-साथ सख्त सुरक्षा नीति भी लागू कर रही है। शाह ने कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्रों में पहले ‘लाल आतंक’ के कारण विकास बाधित था, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और तेजी से प्रगति हो रही है।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
गृह मंत्री ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि दशकों तक आदिवासी क्षेत्र विकास से वंचित रहे, जिसकी जिम्मेदारी पूर्व सरकारों की है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इन इलाकों तक विकास पहुंचा है।
सुरक्षा बलों की सराहना
अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस अभियान में अर्धसैनिक बलों, सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन, राज्य पुलिस और स्थानीय आदिवासियों का महत्वपूर्ण योगदान है।
“नक्सल मुक्त भारत” का लक्ष्य
गृह मंत्री ने विश्वास जताया कि बड़े फैसलों के बाद अब देश को नक्सलवाद से मुक्त करना भी सरकार के एजेंडे में शामिल है और इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।



