न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में अब ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं पर भी सख्त नियम लागू होंगे। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में फैसला लिया गया है कि अब Ola Cabs और Uber जैसी कंपनियों को राज्य में संचालन के लिए अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा।
परिवहन मंत्री Dayashankar Singh ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। अब राज्य में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं को लाइसेंस, पंजीकरण और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत लागू होगा नियम
परिवहन मंत्री के अनुसार यह व्यवस्था Motor Vehicles Act 1988 की धारा 93 के तहत लागू की जाएगी। केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2025 को नियमों में संशोधन किया था, जिसे अब उत्तर प्रदेश सरकार भी लागू करेगी।
अब तक इन कंपनियों पर राज्य स्तर पर सीधा नियंत्रण नहीं था, लेकिन नए नियम लागू होने के बाद इन्हें लाइसेंस लेना होगा और नियमित रूप से शुल्क भी जमा करना होगा।
ड्राइवर की पूरी जानकारी होगी अनिवार्य
नए नियमों के तहत अब ऐप आधारित टैक्सी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए कई अनिवार्य शर्तें लागू होंगी। इनमें शामिल हैं:
- ड्राइवर का मेडिकल टेस्ट
- पुलिस वेरिफिकेशन
- वाहन का फिटनेस टेस्ट
- ड्राइवर और वाहन की पूरी जानकारी का रिकॉर्ड
सरकार एक ऐसा डिजिटल ऐप भी विकसित करेगी, जिसमें ड्राइवर और वाहन से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेगी।
इतना देना होगा शुल्क
नए नियमों के अनुसार:
- पंजीकरण आवेदन शुल्क: ₹25,000
- लाइसेंस शुल्क (50-100 या उससे अधिक गाड़ियां चलाने वाली कंपनियों के लिए): ₹5 लाख
- लाइसेंस रिन्यूअल: हर 5 साल में
- रिन्यूअल शुल्क: ₹5,000
नोटिफिकेशन जारी होने के बाद यह नियम पूरे प्रदेश में लागू कर दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 को भी मंजूरी
कैबिनेट बैठक में परिवहन से जुड़ा एक और बड़ा फैसला लिया गया। सरकार ने Mukhyamantri Gram Parivahan Yojana 2026 को मंजूरी दे दी है।
इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के हर गांव तक बस सेवा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल प्रदेश के करीब 12,200 गांवों में बस सेवा नहीं पहुंचती, लेकिन नई नीति के बाद 59,163 ग्राम सभाओं तक बस सेवा उपलब्ध कराने की योजना है।
ग्रामीणों और छात्रों को होगा बड़ा लाभ
नई योजना के तहत निजी लोगों को बस चलाने की अनुमति दी जाएगी। इन बसों को परमिट और टैक्स से भी छूट दी जाएगी। बसें रात में गांव में ही रुकेंगी, सुबह ब्लॉक और तहसील होते हुए जिला मुख्यालय तक जाएंगी | छात्रों, कर्मचारियों और छोटे व्यापारियों को सुविधा मिलेगी जिन गांवों में बड़ी बसें नहीं जा सकतीं, वहां 7 मीटर लंबाई और अधिकतम 28 सीट वाली छोटी बसें चलाई जाएंगी।



