न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के खिलाफ एक बार फिर Supreme Court of India में जनहित याचिका दायर की गई है। बुधवार को सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने याचिका पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह मामला मीडिया पब्लिसिटी पाने के उद्देश्य से दायर किया गया प्रतीत होता है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि नियम अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बनाए गए हैं। इस पर सीजेआई ने सवाल किया कि मौजूदा याचिका में ऐसा क्या नया है, जो पहले दायर याचिकाओं में नहीं था। उन्होंने टिप्पणी की, “यह जनहित याचिका क्यों? अब यह हद से ज्यादा हो रहा है। क्या यह केवल मीडिया में चर्चा के लिए है?”
जनवरी में लग चुकी है रोक
इससे पहले जनवरी में सुप्रीम कोर्ट की पीठ—जिसमें सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल थे—ने इन विनियमों पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अदालत ने प्रारूप को प्रथम दृष्टया अस्पष्ट बताया था और कहा था कि इसके व्यापक और संभावित रूप से विभाजनकारी परिणाम हो सकते हैं।
पीठ ने यह भी कहा था कि नियमों में कुछ अस्पष्टताएं हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या है विवाद?
याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि UGC ने जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा को सीमित और गैर-समावेशी तरीके से परिभाषित किया है। आरोप है कि नियमों में भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तक सीमित कर दिया गया है, जिससे अन्य श्रेणियां संस्थागत संरक्षण से बाहर रह सकती हैं।
इन प्रावधानों के विरोध में देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र संगठनों और समूहों ने प्रदर्शन भी किए हैं।
क्या कहते हैं नए नियम?
‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026’ के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में गठित समितियों में OBC, SC, ST समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ महिला और दिव्यांग सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य किया गया है।
अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस ताजा याचिका पर क्या रुख अपनाता है। फिलहाल नियमों पर अंतरिम रोक जारी है और मामले की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।



