न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध की आशंका गहराने लगी है। ईरान की ओर से लगातार मिल रही कड़ी धमकियों और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर संभावित हमलों की चेतावनी के बीच अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका अपने प्रमुख मिडिल ईस्ट बेस से सैनिकों और अन्य कर्मियों को वापस बुला रहा है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिका ने अपने सैन्य और गैर-सैन्य कर्मियों की तैनाती कम करने का फैसला किया है। यह जानकारी उस समय सामने आई, जब एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स से बातचीत में खुलासा किया कि तेहरान ने अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले पड़ोसी देशों को सख्त चेतावनी दी है।
ईरान का साफ संदेश: हमला हुआ तो जवाबी कार्रवाई
ईरानी अधिकारी के अनुसार, ईरान ने साफ कर दिया है कि यदि अमेरिका ने उस पर हमला किया, तो वह पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा। इस चेतावनी में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और तुर्की जैसे क्षेत्रीय देश भी शामिल हैं।
ईरान पर कई मोर्चों से दबाव
इस समय ईरान अंदरूनी और बाहरी दोनों तरह के संकटों से जूझ रहा है। एक ओर पिछले दो हफ्तों से देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं, तो दूसरी ओर अमेरिका की ओर से लगातार सैन्य कार्रवाई की धमकियां मिल रही हैं। अमेरिकी हमले की आशंका के बीच ईरान ने क्षेत्रीय देशों को पहले ही सतर्क कर दिया है।
प्रदर्शनकारियों पर सख्ती के संकेत
इसी बीच ईरान की न्यायपालिका ने देश में जारी प्रदर्शनों को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। ईरानी न्यायपालिका प्रमुख गुलामहुसैन मोहसेनी-एजेई ने एक वीडियो संदेश में गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों के मामलों में तेज सुनवाई और कड़ी सजा की बात कही है।
ईरानी सरकारी टीवी द्वारा जारी वीडियो में मोहसेनी-एजेई कहते नजर आए कि अगर कोई कार्रवाई करनी है तो उसे तुरंत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दो-तीन महीने की देरी का असर नहीं होगा और फैसले समय पर होने चाहिए।
ट्रंप की चेतावनी के बाद बढ़ी तल्खी
ईरानी न्यायपालिका प्रमुख की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साक्षात्कार में ईरान को चेतावनी दी थी। ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरान फांसी जैसी कार्रवाइयों को अंजाम देता है, तो अमेरिका सख्त जवाब देगा।
इन बयानों के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य तनाव और तेज हो गया है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों की वापसी को संभावित संघर्ष से पहले एहतियाती कदम के तौर पर देखा जा रहा है।



