नेहरू ने देश को सिंधु जल संधि के जरिए धोखा दिया: NDA सांसदों से बोले पीएम मोदी

नई दिल्ली /सर्वोदय न्यूज़:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एनडीए संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नेहरू ने 1960 की सिंधु जल संधि में पाकिस्तान को बड़ी रियायतें दीं और इस तरह देश व किसानों के हितों से समझौता किया।

पीएम मोदी ने NDA सांसदों से आग्रह किया कि वे देशभर में जाकर जनता को बताएं कि नेहरू ने कैसे अपनी छवि बचाने के लिए भारत के जल संसाधनों पर समझौता किया।

नेहरू ने बिना संसद की मंजूरी दी 80% जल पाकिस्तान को

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता बिना संसद या कैबिनेट की अनुमति के किया गया था। नेहरू ने सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी प्रमुख पश्चिमी नदियां पाकिस्तान को सौंप दीं, जबकि भारत को रावी, ब्यास और सतलुज ही मिलीं। “नेहरू ने देश को एक बार विभाजित किया और सिंधु जल संधि के जरिए दूसरी बार भी,” – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नेहरू ने बाद में गलती मानी, कहा- कुछ बाल्टियों के लिए शोर क्यों?

पीएम मोदी ने याद दिलाया कि जब अटल बिहारी वाजपेयी समेत विपक्षी नेताओं ने संधि का विरोध किया, तो नेहरू ने इसे हल्के में लिया और कहा कि “कुछ बाल्टियों पानी के लिए इतना शोर क्यों?”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि नेहरू ने अक्साई चिन पर चीन के कब्जे को भी यह कहकर टाल दिया था कि “वहां घास का एक तिनका भी नहीं उगता।”

अब भारत ने स्थगित कर दी है सिंधु जल संधि

पीएम मोदी ने बताया कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है। अब यह तभी बहाल होगी जब पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना स्थायी रूप से बंद करेगा।

सिंधु जल संधि क्या है?

1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से यह समझौता हुआ था। इसके तहत:

  • पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम, चिनाब) पाकिस्तान को
  • पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास, सतलुज) भारत को दी गईं।

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