इन्वेस्ट यूपी रिश्वतकांड में बड़ा खुलासा: पूर्व सीईओ अभिषेक प्रकाश का नाम चार्जशीट में, एसआईटी ने कोर्ट में पेश की 1600 पन्नों की रिपोर्ट

लखनऊ/सर्वोदय:- उत्तर प्रदेश में सोलर प्लांट परियोजना को लेकर इन्वेस्ट यूपी में रिश्वतखोरी के मामले ने अब और गंभीर मोड़ ले लिया है। इस प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी ने सोमवार को लखनऊ की अदालत में 1600 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की, जिसमें कई अहम खुलासे किए गए हैं। चार्जशीट में इन्वेस्ट यूपी के निलंबित पूर्व सीईओ अभिषेक प्रकाश का नाम सामने आने के बाद, उनके खिलाफ कार्रवाई की संभावना और प्रबल हो गई है।

शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब परियोजना से जुड़े निवेशक विश्वजीत दत्ता ने आरोप लगाया कि सोलर प्रोजेक्ट को स्वीकृति दिलवाने के लिए उनसे कुल लागत का 5% “कमीशन” मांगा गया। उनके मुताबिक, यह मांग निकांत जैन द्वारा की गई थी, जो उस समय इन्वेस्ट यूपी से जुड़ा हुआ था।

चार्जशीट में दर्ज बयान में विश्वजीत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह रिश्वत की मांग निकांत ने तत्कालीन सीईओ अभिषेक प्रकाश के निर्देश पर की थी। उन्होंने दावा किया कि बातचीत के दौरान निकांत बार-बार अभिषेक का हवाला देता रहा, जिससे यह प्रतीत होता है कि यह पूरा षड्यंत्र पूर्व-नियोजित था।

50 से अधिक गवाहों के बयान शामिल

एसआईटी द्वारा तैयार की गई इस चार्जशीट में इन्वेस्ट यूपी के मौजूदा और पूर्व अधिकारियों सहित कुल 50 से अधिक गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं। निकांत जैन से चार दिन पहले जेल में पूछताछ की गई थी, जिसमें कुछ नए तथ्य सामने आए हैं जिन पर फिलहाल जांच जारी है।

एसआईटी का कहना है कि यदि शिकायतकर्ता के आरोपों और अन्य साक्ष्यों से पुष्टि होती है, तो केस में और भी नामों को शामिल किया जा सकता है।

कोर्ट की सख्ती, जवाब तलब

इससे पहले, कोर्ट ने गोमतीनगर पुलिस से सवाल किया था कि जब शिकायत में स्पष्ट रूप से अधिकारी का नाम लिया गया है, तो उसे प्राथमिकी में क्यों नहीं जोड़ा गया। पुलिस ने सफाई देते हुए कहा था कि जांच अभी जारी है और साक्ष्य के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

सोमवार को चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत ने बचाव पक्ष की ओर से उठाए गए कुछ सवालों पर भी ध्यान दिया और संबंधित एजेंसियों से स्पष्टीकरण मांगा है।

इस मामले की जांच में एएसपी विकास चंद्र त्रिपाठी, एसीपी विनय कुमार द्विवेदी और इंस्पेक्टर आलोक राय शामिल हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नामों का पर्दाफाश हो सकता है।

इस रिश्वत प्रकरण ने उत्तर प्रदेश में निवेशकों के भरोसे को झटका दिया है और निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Source- Google

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