लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का परिणाम घोषित हो गया है। प्रदेश की सभी 10 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आठ और समाजवादी पार्टी (SP) के दो प्रत्याशी शामिल हैं। चुनाव में किसी अन्य उम्मीदवार के मैदान में नहीं रहने के कारण मतदान की जरूरत नहीं पड़ी और सभी प्रत्याशियों की जीत का रास्ता साफ हो गया।
शुक्रवार को नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वाचन अधिकारी अजीत वर्मा ने सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की घोषणा की। इस परिणाम के बाद भाजपा और समाजवादी पार्टी, दोनों खेमों में खुशी देखने को मिली।
यूपी में भाजपा के 8 और सपा के 2 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की कुल 10 सीटों के लिए चुनाव होना था। भाजपा ने आठ उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से दो प्रत्याशियों ने नामांकन किया था। इसके अलावा दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी चुनाव लड़ने के लिए पर्चे दाखिल किए थे।
हालांकि, जांच प्रक्रिया के दौरान दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन रद्द कर दिए गए। इसके बाद चुनाव मैदान में केवल 10 उम्मीदवार ही बचे, जबकि उपलब्ध सीटों की संख्या भी इतनी ही थी। ऐसे में किसी तरह के मुकाबले की स्थिति नहीं बनी और सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए।
भाजपा के कौन-कौन से उम्मीदवार पहुंचे राज्यसभा?
उत्तर प्रदेश से निर्विरोध चुने गए भाजपा के आठ उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह, विद्यासागर सोनकर, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, प्रियंका सिंह रावत, गोपीकृष्ण पांडेय, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं।
वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से प्रोफेसर राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।
निर्वाचन अधिकारी अजीत वर्मा के अनुसार, धनराज परिमल नाथवानी को छोड़कर बाकी सभी निर्वाचित उम्मीदवार अपने निर्वाचन प्रमाणपत्र प्राप्त कर चुके थे।
दो निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन हुए रद्द
राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में कंते सयन्ना और ओंकार नाथ चौरसिया ने नामांकन दाखिल किया था। दोनों के पर्चे रद्द होने के बाद चुनावी मुकाबले की संभावना समाप्त हो गई।
नामांकन पत्रों की जांच के दौरान ही यह स्पष्ट होने लगा था कि प्रदेश की सभी सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन हो सकता है। आखिरकार, उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर रह जाने के कारण मतदान की प्रक्रिया नहीं हुई।
क्यों नहीं हुआ राज्यसभा चुनाव में मतदान?
राज्यसभा चुनाव में मतदान की जरूरत तब पड़ती है, जब वैध उम्मीदवारों की संख्या उपलब्ध सीटों से अधिक हो। उत्तर प्रदेश में दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन रद्द होने के बाद मैदान में 10 उम्मीदवार ही रह गए थे। चूंकि राज्यसभा की 10 सीटों के लिए भी इतने ही प्रत्याशी थे, इसलिए सभी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।
इस तरह उत्तर प्रदेश में इस बार राज्यसभा चुनाव बिना मतदान के संपन्न हो गया। भाजपा को आठ सीटें मिलीं, जबकि समाजवादी पार्टी के खाते में दो सीटें गईं।


