‘मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं …’, 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशनों और रेल सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाना जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह बाधित नहीं होनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की कि ‘मक्खी को मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।’

प्रदर्शन से पहले दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों को बंद करने और नई दिल्ली व हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने वाली ट्रेनों को रद्द किए जाने की खबरों के बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि सुरक्षा के इंतजाम ऐसे होने चाहिए, जिनसे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप न हो और आम यात्रियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा कि दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग रोजाना आवागमन करते हैं। ऐसे में पाबंदियां लगाने और परिवहन सेवाओं को पूरी तरह बंद करने के बीच अंतर समझना जरूरी है। यह सुनवाई माकपा (CPI-M) के महासचिव एम.ए. बेबी की याचिका पर हुई, जिसमें मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और रेल सेवाएं रद्द करने के फैसलों को चुनौती दी गई थी।

‘सिर्फ उतने ही प्रतिबंध लगाएं, जितने जरूरी हों’

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि संभावित अव्यवस्था को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन प्रतिबंधों का दायरा आवश्यकता से अधिक नहीं होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि सुरक्षा व्यवस्था और आम लोगों की सुविधाओं के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत की टिप्पणी को लेकर कहा कि इसे इस तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए, मानो भारत के मुख्य न्यायाधीश ने सरकार की कार्रवाई पर सीधे तौर पर यह टिप्पणी की हो कि वह मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल कर रही है।

इस पर सीजेआई ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त सतर्कता बरतने में कोई बुराई नहीं है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इस जिम्मेदारी में आम नागरिकों की सुरक्षा भी शामिल है। उन्होंने बच्चों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और मरीजों की आवाजाही का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे लोगों का जीवन पूरी तरह प्रभावित न हो।

छात्रों, कर्मचारियों और बुजुर्गों की परेशानी पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले का मुख्य मुद्दा केवल प्रदर्शनकारियों की आवाजाही नहीं, बल्कि उन आम लोगों की मुश्किलें भी हैं, जो रोजी-रोटी, पढ़ाई और इलाज जैसी जरूरतों के लिए दिल्ली आते-जाते हैं।

अदालत ने गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा, पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली से यात्रा करने वाले छात्रों, कर्मचारियों तथा बुजुर्गों की परेशानियों का जिक्र किया। इनमें से बड़ी संख्या में लोग रोजाना मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।

पीठ ने कहा कि यदि किसी स्थान पर भीड़ को नियंत्रित करने की जरूरत है, तो उसके लिए लक्षित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह बंद हो जाए और लोगों के पास आने-जाने का कोई व्यावहारिक विकल्प न बचे।

मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लगाने की बात

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह संबंधित अधिकारियों से परिवहन सेवाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह करेंगे। उन्होंने मेट्रो और अन्य रेल सेवाओं को उचित नियंत्रण एवं सुरक्षा नियमों के तहत जारी रखने की संभावना पर भी बात रखी।

अदालत ने इस आश्वासन के मद्देनजर कहा कि मेट्रो सेवाओं की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए। पीठ ने अधिकारियों से ऐसी व्यवस्था पर विचार करने को कहा, जिससे सुरक्षा बनाए रखते हुए मेट्रो और अन्य रेल सेवाएं नियंत्रित तरीके से जारी रह सकें और आम लोगों को कम से कम परेशानी हो।

बैरिकेडिंग और वैकल्पिक रास्तों पर भी दोबारा विचार करने की सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों पर बैरिकेडिंग के फैसले की भी समीक्षा करने की बात कही। अदालत के मुताबिक, सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

पीठ ने वैकल्पिक मार्गों के बारे में आम जनता को समय रहते जानकारी देने पर भी जोर दिया। अदालत की टिप्पणी का सार यह रहा कि सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है, लेकिन उसके लिए अपनाए जाने वाले उपाय संतुलित और जरूरत के अनुरूप होने चाहिए।

इस मामले में अब संबंधित अधिकारियों के फैसले और परिवहन सेवाओं को जारी रखने के लिए किए जाने वाले इंतजाम महत्वपूर्ण होंगे।

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