नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी की राजनीति में एक और बड़ा राजनीतिक बदलाव सामने आया है। कैराना से पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे एवं पूर्व विधायक नवाजिश आलम ने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) से अलग होकर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। दोनों नेताओं ने नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में पार्टी का हाथ थामा।
कांग्रेस में शामिल होने के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत पार्टी के कई नेता मौजूद रहे। दोनों नेताओं के आसपा से इस्तीफा देने के बाद से ही कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाएं चल रही थीं।
चार दशक से पश्चिमी यूपी की राजनीति में सक्रिय हैं अमीर आलम
अमीर आलम पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर करीब चार दशक पुराना है। उन्होंने 1985 में थानाभवन विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया था। इसके बाद 1989 में मोरना और 1996 में फिर थानाभवन से विधायक बने।
अमीर आलम उत्तर प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री भी रह चुके हैं। इसके बाद वह कैराना लोकसभा सीट से सांसद चुने गए और बाद में समाजवादी पार्टी की ओर से राज्यसभा सदस्य भी रहे।
अमीर आलम और उनके बेटे नवाजिश आलम ने फरवरी 2025 में आजाद समाज पार्टी की सदस्यता ली थी। करीब डेढ़ साल बाद सितंबर 2026 में दोनों ने पार्टी छोड़ने का फैसला किया।
नवाजिश आलम का भी रहा है राजनीतिक सफर
नवाजिश आलम ने 2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर बुढ़ाना विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर राजनीति में अपनी जगह बनाई। 2017 में उन्होंने मीरापुर सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली।
इसके बाद 2018 में नवाजिश आलम अपने पिता के साथ राष्ट्रीय लोकदल में शामिल हुए। वर्ष 2025 में दोनों ने आजाद समाज पार्टी का रुख किया था। अब पिता-पुत्र की जोड़ी कांग्रेस में शामिल हो गई है।
थानाभवन सीट को लेकर चर्चा तेज
कांग्रेस में शामिल होने के बाद नवाजिश आलम की अगली राजनीतिक भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। पश्चिमी यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए थानाभवन विधानसभा सीट पर उनकी संभावित दावेदारी की चर्चा राजनीतिक हलकों में है।
हालांकि, कांग्रेस ने अभी तक थानाभवन सीट से किसी उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए नवाजिश आलम की उम्मीदवारी को फिलहाल संभावित दावेदारी के तौर पर ही देखा जा रहा है।
पश्चिमी यूपी में बदलते राजनीतिक समीकरण
अमीर आलम और नवाजिश आलम के कांग्रेस में शामिल होने का घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दल संगठनात्मक तैयारियां तेज कर रहे हैं।
पश्चिमी यूपी के शामली, मुजफ्फरनगर और कैराना क्षेत्र में दोनों नेताओं की लंबे समय से राजनीतिक सक्रियता रही है। ऐसे में उनका कांग्रेस में जाना स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, इसका चुनावी प्रभाव क्या होगा, यह आगामी राजनीतिक घटनाक्रम और चुनाव परिणामों के बाद ही स्पष्ट होगा।


