लखनऊ/सर्वोदय न्यूज : राजधानी स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में एक परिवार ने बेहद कठिन समय में ऐसा फैसला लिया, जिसने मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। बाराबंकी निवासी मनोज कुमार के ब्रेन स्टेम डेथ के बाद उनके परिजनों ने अंगदान की सहमति देकर तीन जरूरतमंद मरीजों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगा
मनोज कुमार को 25 अगस्त 2026 को उपचार के लिए लोहिया संस्थान में भर्ती कराया गया था। उन्हें इमरजेंसी ईसीयू में डॉ. एस.एस. नाथ के निर्देशन में उपचार दिया जा रहा था। चिकित्सकों की ओर से लगातार प्रयास किए जाने के बावजूद उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका।
ब्रेन स्टेम डेथ के बाद हुई प्रक्रिया
चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत संस्थान की ब्रेन स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन टीम ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद मनोज कुमार को ब्रेन स्टेम डेड घोषित किया। इस टीम में डॉ. पी.के. मौर्या, डॉ. ऋतु करौली, डॉ. एस.एस. नाथ और डॉ. अरविंद कुमार सिंह शामिल रहे।
इसके बाद चिकित्सकीय टीम ने परिजनों को अंगदान के महत्व और इसकी पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। ग्रीफ काउंसलर सुभाष शुक्ला और ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर बर्नाडिक्ट मिंज ने डॉ. संदीप कुमार यादव और डॉ. एस.एस. नाथ के सहयोग से परिवार से बातचीत की और उन्हें अंगदान के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को मिलने वाले जीवन के अवसर के बारे में समझाया।
दुख की घड़ी में परिवार ने लिया बड़ा फैसला
प्रियजन को खोने के दुख के बीच परिवार ने साहस दिखाते हुए अंगदान के लिए अपनी सहमति दे दी। परिवार के इस निर्णय के बाद उपलब्ध अंगों को जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई। संस्थान के अनुसार इस अंगदान से तीन मरीजों के जीवन में नई उम्मीद पैदा हुई है।
अंगदान की स्वीकृति मिलने के बाद ऑर्गन रिट्रीवल की पूरी प्रक्रिया को निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से पूरा कराया गया। इस दौरान संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरविंद कुमार सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कई विभागों की टीम ने मिलकर पूरा किया ऑर्गन रिट्रीवल
ऑर्गन रिट्रीवल प्रक्रिया में यूरोलॉजी, निश्चेतना, नेफ्रोलॉजी और फॉरेंसिक विभाग समेत कई टीमों ने समन्वय के साथ काम किया।
यूरोलॉजी विभाग की ओर से डॉ. ईश्वर राम धयाल, डॉ. आलोक श्रीवास्तव और डॉ. संजीत सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं निश्चेतना विभाग से डॉ. पी.के. दास और डॉ. निधि शुक्ला ने प्रक्रिया को निर्धारित समय के अनुसार पूरा कराने में सहयोग किया।
नेफ्रोलॉजी विभाग की टीम में डॉ. अभिलाष चंद्रा और डॉ. नम्रता राव ने डोनर से संबंधित आवश्यक जांच, अंगों की उपयुक्तता का मूल्यांकन और संभावित रिसीपिएंट्स की तैयारी की प्रक्रिया पूरी कराई। इससे उपलब्ध अंगों के उचित और समय पर इस्तेमाल में मदद मिली।
फॉरेंसिक और कानूनी प्रक्रिया भी समय पर पूरी
ऑर्गन रिट्रीवल से जुड़ी आवश्यक फॉरेंसिक औपचारिकताओं को पूरा कराने में फॉरेंसिक विभाग के डॉ. प्रदीप और डॉ. आलोक का सहयोग रहा।
वहीं अंगदान से संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा कराने में हेड कांस्टेबल कमलेश यादव और विवेक यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी संबंधित टीमों के आपसी तालमेल से पूरी प्रक्रिया निर्धारित समय में संपन्न की गई।
संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन
संस्थान के अनुसार पूरी प्रक्रिया निदेशक प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विक्रम सिंह के मार्गदर्शन एवं सहयोग से सफलतापूर्वक पूरी हुई।
परिवार के सदस्यों संतोष मिश्रा और लक्ष्मण तिवारी ने भावुक होकर कहा कि अंगदान का निर्णय उनके प्रियजन की स्मृति को सार्थक बनाने वाला कदम है। उनका कहना था कि जाते-जाते भी मनोज कुमार ने दूसरों के जीवन में उम्मीद जगाने का काम किया। परिवार ने उम्मीद जताई कि उनका यह फैसला समाज के अन्य लोगों को भी अंगदान के लिए प्रेरित करेगा।
संस्थान ने परिवार के फैसले को बताया अनुकरणीय
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान परिवार ने अंगदाता मनोज कुमार को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिजनों के साहसिक निर्णय के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
संस्थान ने कहा कि अपनों को खोने के कठिन समय में अंगदान की सहमति देना मानवता और संवेदनशीलता का उदाहरण है। परिवार के इस फैसले ने न केवल तीन जरूरतमंद मरीजों के लिए उम्मीद जगाई, बल्कि अंगदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने का संदेश भी दिया।


