लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (डॉ. आरएमएलआईएमएस), लखनऊ के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के सहयोग से मंगलवार को ‘उत्तर प्रदेश में वेक्टर जनित रोग उन्मूलन कार्यक्रम की स्थिति: विसराल लीशमैनियासिस एवं लिम्फैटिक फाइलेरियासिस’ विषय पर विशेष अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया। कार्यक्रम में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भारत के राज्य एनटीडी समन्वयक डॉ. तनुज शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया।
यह व्याख्यान संस्थान के एकेडमिक ब्लॉक स्थित माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डेमो रूम में आयोजित किया गया, जिसमें संकाय सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों, शोधार्थियों और मेडिकल छात्रों ने भाग लिया।

कालाजार और फाइलेरिया उन्मूलन पर विशेष चर्चा
अपने व्याख्यान में डॉ. तनुज शर्मा ने उत्तर प्रदेश में विसराल लीशमैनियासिस (कालाजार) और लिम्फैटिक फाइलेरियासिस (हाथीपांव) जैसी उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारियों (NTDs) की वर्तमान स्थिति, उन्मूलन अभियान की प्रगति और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश ने कालाजार के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है और राज्य अब इस बीमारी के उन्मूलन के बेहद करीब पहुंच चुका है। उन्होंने “घर-घर दस्तक” अभियान और सिंगल-डोज एम्बिसोम थेरेपी को इस उपलब्धि का प्रमुख आधार बताया।

मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन और वेक्टर नियंत्रण पर जोर
व्याख्यान के दौरान प्रभावित जिलों में मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA), ट्रिपल ड्रग थेरेपी, वेक्टर नियंत्रण, इंडोर रेसिड्यूअल स्प्रे (IRS), स्वच्छता अभियान और फाइलेरिया मरीजों के रुग्णता प्रबंधन एवं विकलांगता निवारण (MMDP) जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
डॉ. शर्मा ने कहा कि समय पर जांच, जन-जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच ही वेक्टर जनित रोगों के उन्मूलन की सबसे प्रभावी रणनीति है। उन्होंने अभियान का संदेश दोहराते हुए कहा कि “सूचना और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच से ही उपेक्षित रोगों का अंत संभव है।”

मेडिकल कॉलेजों की भूमिका अहम
व्याख्यान में मेडिकल कॉलेजों, शोध संस्थानों और प्रयोगशालाओं की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि चिकित्सा संस्थानों की सक्रिय भागीदारी से रोगों की पहचान, निगरानी और उपचार व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकता है।

विभागाध्यक्ष ने की पहल की सराहना
माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. ज्योत्सना अग्रवाल ने व्याख्यान की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से न केवल कालाजार और फाइलेरिया बल्कि मलेरिया जैसी अन्य वेक्टर जनित बीमारियों की पहचान और नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए जागरूकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण बेहद आवश्यक है।
व्याख्यान के अंत में प्रतिभागियों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों और चिकित्सकों ने विशेषज्ञ से विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की।



