Rampur News: रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को गिराने के आदेश पर फिलहाल रोक जारी रहेगी। सोमवार को हुई सुनवाई में मुरादाबाद मंडलायुक्त (कमिश्नर) कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 30 अगस्त निर्धारित की है।
कोर्ट के फैसले से मिली राहत
मंडलायुक्त कोर्ट के इस आदेश के बाद जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। अदालत ने अंतरिम आदेश को जारी रखते हुए कहा कि अपील लंबित रहने तक विवादित भवनों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक बनी रहेगी।
आरडीए के आदेश को दी गई थी चुनौती
मामला रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) की उस कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें विश्वविद्यालय परिसर में बने 38 भवनों को अवैध निर्माण बताते हुए उन्हें हटाने का आदेश जारी किया गया था।
आरडीए के आदेश के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मंडलायुक्त के समक्ष अपील दाखिल की थी। इसी अपील पर सुनवाई करते हुए पहले भी अदालत ने ध्वस्तीकरण पर अंतरिम रोक लगाई थी, जिसे अब बरकरार रखा गया है।
38 भवनों को लेकर जारी हुआ था नोटिस
रामपुर विकास प्राधिकरण की टीम ने जुलाई में विश्वविद्यालय परिसर पहुंचकर ध्वस्तीकरण आदेश का नोटिस प्रबंधन को सौंपा था। नोटिस में निर्देश दिया गया था कि निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित भवनों को स्वयं हटाया जाए। साथ ही यह भी कहा गया था कि आदेश का पालन नहीं होने पर प्राधिकरण स्वयं कार्रवाई करेगा और उसका खर्च संबंधित पक्ष से भू-राजस्व की तरह वसूला जाएगा।
क्या है पूरा विवाद?
रामपुर विकास प्राधिकरण ने 28 जून को मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के सचिव और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर 38 भवनों के स्वीकृत मानचित्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा था।
प्रबंधन की ओर से जवाब मिलने के बाद व्यक्तिगत सुनवाई हुई। इसके बाद आरडीए के उपाध्यक्ष ने यह कहते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया कि अकादमिक और मेडिकल भवनों को छोड़कर लगभग 82,309.80 वर्गमीटर क्षेत्र में बने 38 भवन बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्मित पाए गए हैं।
अगली सुनवाई 30 अगस्त को
मामले में अब अगली सुनवाई 30 अगस्त को होगी। इसी दौरान दोनों पक्षों की दलीलों पर आगे विचार किया जाएगा। तब तक जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के खिलाफ किसी भी प्रकार की बुलडोजर कार्रवाई नहीं की जाएगी।



