Wednesday, June 24, 2026

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अब सस्ती होगी रसोई गैस? भारत ने अमेरिका से खरीदी 10 लाख टन LPG, जानिए क्या होगा सिलेंडर की कीमतों पर असर

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- भारत की ऊर्जा सुरक्षा और एलपीजी सप्लाई से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने एलपीजी (LPG) आयात के मोर्चे पर बड़ा कदम उठाया है। जून 2026 में भारत द्वारा अमेरिका से रिकॉर्ड स्तर पर एलपीजी खरीदने की तैयारी की गई है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इस महीने अमेरिका से होने वाला एलपीजी आयात 10 लाख टन से अधिक पहुंच सकता है, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा माना जा रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में उत्पन्न बाधाओं के कारण वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसी वजह से भारत को पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं के अलावा अन्य विकल्पों की तलाश करनी पड़ी और अमेरिका इस समय सबसे बड़ा विकल्प बनकर सामने आया है।

भारत अपनी घरेलू एलपीजी मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। अब तक देश की अधिकांश गैस जरूरतें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और अन्य खाड़ी देशों से पूरी होती रही हैं। सामान्य तौर पर भारत हर महीने करीब 20 लाख टन एलपीजी आयात करता है, लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण अप्रैल 2026 में आयात घटकर 6.96 लाख टन तक पहुंच गया था।

स्थिति को देखते हुए सरकार और तेल कंपनियों ने वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका से बड़े पैमाने पर खरीदारी शुरू की। इसका असर मई महीने में देखने को मिला, जब एलपीजी आयात बढ़कर लगभग 11.5 लाख टन हो गया। जून में कुल आयात 11 से 12 लाख टन के बीच रहने का अनुमान है, जिसमें अमेरिका की हिस्सेदारी 10 लाख टन से अधिक हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत पहले से ही अमेरिका के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा था। हालांकि, मध्य पूर्व में पैदा हुए संकट ने इस प्रक्रिया को और गति दे दी। घरेलू गैस आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने ऊंचे दामों पर भी अमेरिकी एलपीजी खरीदने में रुचि दिखाई।

सरकार ने केवल आयात बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि देश के भीतर भी कई अहम कदम उठाए। रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए, घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी गई और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क के विस्तार पर भी जोर दिया गया। इन प्रयासों के चलते एलपीजी की मांग में 15 से 20 प्रतिशत तक कमी दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

जून महीने में अमेरिका के अलावा यूएई से 3 से 4 लाख टन एलपीजी मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं कुवैत से लगभग 45 हजार टन गैस आपूर्ति होने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त कतर, ओमान, ईरान, अल्जीरिया और नाइजीरिया जैसे देशों से भी सीमित मात्रा में एलपीजी की आपूर्ति जारी है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थिति सामान्य होती है और मध्य पूर्व से आपूर्ति सुचारु रूप से बहाल हो जाती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। ऐसे में भविष्य में भारत को अपेक्षाकृत सस्ती गैस उपलब्ध होने की संभावना बढ़ेगी। फिलहाल अमेरिका भारत का प्रमुख एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है, जिसे देश की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

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