लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड के बाद किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर में सोमवार को बेहद भावुक और हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला। हादसे की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में परिजन अपने प्रियजनों की तलाश में अस्पताल पहुंच गए। कोई घायलों की सूची में नाम ढूंढ रहा था तो कोई मोबाइल फोन में तस्वीर दिखाकर डॉक्टरों और कर्मचारियों से अपने बेटे-बेटी या रिश्तेदार के बारे में जानकारी मांग रहा था।
ट्रॉमा सेंटर के बाहर हर चेहरे पर चिंता, डर और उम्मीद साफ दिखाई दे रही थी। कई परिजन शवगृह और इमरजेंसी वार्ड के बीच चक्कर लगाते रहे। उनकी जुबान पर बस एक ही सवाल था—”मेरा अपना कहां है?” अस्पताल परिसर में घंटों तक चीख-पुकार, आंसुओं और बेचैनी का माहौल बना रहा।
डॉक्टरों और कर्मचारियों ने संभाला मोर्चा
हादसे के बाद ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम लगातार घायलों के इलाज में जुटी रही। वहीं अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को जानकारी उपलब्ध कराने और उन्हें मानसिक रूप से संभालने का भी प्रयास किया। बावजूद इसके, अपने प्रियजनों की तलाश में भटक रहे परिवारों का दर्द कम नहीं हो पा रहा था।
तीन मंजिला इमारत में लगी थी भीषण आग
अलीगंज सेक्टर-डी स्थित एक व्यावसायिक भवन में सोमवार दोपहर करीब 2:15 बजे भीषण आग लग गई थी। आग इतनी तेजी से फैली कि दूसरी और तीसरी मंजिल पर मौजूद छात्र-छात्राओं को जान बचाने के लिए खिड़कियां तोड़कर और एसी के पाइपों के सहारे नीचे उतरने की कोशिश करनी पड़ी।
इस दर्दनाक हादसे में छात्रों और कर्मचारियों समेत 15 लोगों की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना की सूचना मिलने के काफी समय बाद दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली।
मुख्यमंत्री ने ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर जाना हाल
घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़ दिया और सीधे लखनऊ पहुंचे। मुख्यमंत्री ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर घायलों का हालचाल लिया और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।
जान बचाने के लिए कूदा छात्र, गंभीर रूप से घायल
अग्निकांड में कई छात्र जान बचाने के प्रयास में घायल हुए। इनमें 26 वर्षीय जयंत गुप्ता भी शामिल हैं, जिन्होंने आग से बचने के लिए पहली मंजिल से छलांग लगा दी। नीचे गिरते समय लोहे की ग्रिल की सरिया उनकी कमर में धंस गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
जयंत को तत्काल केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। उनके पिता प्रदीप कुमार ने बताया कि उनका बेटा एनीमेशन कोर्स कर रहा था और परिवार को कभी अंदाजा नहीं था कि पढ़ाई के लिए जाने वाला संस्थान इस तरह हादसे का केंद्र बन जाएगा।
दिल्ली की सॉफ्टवेयर डेवलपर भी घायल
हादसे में दिल्ली निवासी लवप्रीत भी गंभीर रूप से घायल हुई हैं। वह पेशे से सॉफ्टवेयर डेवलपर हैं। आग से बचने की कोशिश के दौरान उन्हें शरीर के कई हिस्सों में चोटें आईं। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है।
यह हादसा एक बार फिर व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा मानकों और अग्निशमन व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।



