न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- पालतू कुत्ते परिवार का अहम हिस्सा होते हैं। बचपन में उनकी ऊर्जा और चंचलता घर को खुशियों से भर देती है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उनकी जरूरतें भी बदलने लगती हैं। पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश कुत्तों को 7 वर्ष की उम्र के बाद सीनियर श्रेणी में माना जाता है। इस दौरान उनकी सेहत, खानपान और दैनिक देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है।
डॉ. हेमंत तिवारी (Veterinary Surgeon & Pet Care Expert) और डॉ. प्रियंका तिवारी (Veterinary Physician) का कहना है कि सही पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच और उचित देखभाल के जरिए उम्रदराज डॉग्स को लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय रखा जा सकता है।
कैसे पहचानें कि आपका डॉग सीनियर स्टेज में पहुंच रहा है?
उम्र बढ़ने के साथ कुत्तों में कई शारीरिक और व्यवहारिक बदलाव दिखाई देने लगते हैं। इनमें पहले की तुलना में कम सक्रिय रहना, ज्यादा समय तक आराम करना, सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी, वजन में बदलाव, सुनने या देखने की क्षमता कमजोर होना और बालों का सफेद होना शामिल है।
इसके अलावा कुछ डॉग्स में खेल-कूद में रुचि कम होना और व्यवहार में बदलाव भी देखने को मिल सकता है। हालांकि ये बदलाव सामान्य उम्र बढ़ने का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन कई बार किसी बीमारी का संकेत भी साबित होते हैं।
नियमित हेल्थ चेकअप है बेहद जरूरी
पशु चिकित्सकों के मुताबिक सीनियर डॉग्स में कई बीमारियां धीरे-धीरे विकसित होती हैं और शुरुआती चरण में उनके लक्षण स्पष्ट नहीं होते। ऐसे में हर छह महीने पर स्वास्थ्य परीक्षण करवाना फायदेमंद माना जाता है।
विशेषज्ञ जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट, लिवर और किडनी फंक्शन जांच, ब्लड शुगर और यूरिन टेस्ट कराने की सलाह देते हैं ताकि किसी बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सके।
उम्र के हिसाब से बदलें डाइट
बढ़ती उम्र के साथ कुत्तों का मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है। ऐसे में पहले जैसी डाइट जारी रखने से मोटापे का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार सीनियर डॉग्स के भोजन में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, सीमित कैलोरी, पर्याप्त फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड और जोड़ों की सेहत के लिए जरूरी पोषक तत्व शामिल होने चाहिए।
जोड़ों और हड्डियों की समस्याओं पर रखें नजर
उम्र बढ़ने के साथ गठिया और जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। यदि कुत्ता उठने-बैठने, चलने या सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई महसूस कर रहा है तो इसे केवल उम्र का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर पशु चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है।
हल्का व्यायाम भी है फायदेमंद
विशेषज्ञों का कहना है कि सीनियर डॉग्स को पूरी तरह निष्क्रिय नहीं होने देना चाहिए। नियमित और हल्की वॉक मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने, वजन नियंत्रित करने, जोड़ों को सक्रिय रखने और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाने में मदद करती है।
दांतों की सफाई पर दें विशेष ध्यान
उम्रदराज कुत्तों में दांत और मसूड़ों से जुड़ी समस्याएं काफी आम होती हैं। मुंह से बदबू आना, खाना चबाने में परेशानी या मसूड़ों से खून निकलना गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण
कुछ सीनियर डॉग्स में भ्रमित होना, रात में बेचैनी महसूस करना, बिना वजह इधर-उधर घूमना या व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन संकेतों को सामान्य बुढ़ापे का हिस्सा समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।
वजन और पानी पीने की आदतों पर रखें नजर
अचानक वजन बढ़ना या कम होना, साथ ही पानी पीने की मात्रा में बदलाव कई गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इसलिए इन बदलावों पर लगातार निगरानी रखना जरूरी है।
आरामदायक माहौल बनाना भी जरूरी
सीनियर डॉग्स के लिए नरम बिस्तर, फिसलन रहित फर्श, आसानी से उपलब्ध भोजन और पानी तथा अत्यधिक गर्मी या ठंड से बचाव जैसी सुविधाएं उनकी जीवन गुणवत्ता को बेहतर बना सकती हैं।
निष्कर्ष
विशेषज्ञों का कहना है कि उम्र बढ़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन सही देखभाल और समय पर चिकित्सा सलाह के जरिए सीनियर डॉग्स को स्वस्थ, सक्रिय और खुशहाल रखा जा सकता है। बढ़ती उम्र में उन्हें पहले से अधिक ध्यान, सुरक्षा और स्नेह की जरूरत होती है।



