न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी एक बार फिर अपने पुराने आंदोलनकारी अंदाज में नजर आईं। विधानसभा चुनाव में हार के बाद मंगलवार को उन्होंने कोलकाता के धर्मतल्ला इलाके में भाजपा के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया और पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संघर्ष जारी रखने का संदेश दिया।
ममता बनर्जी ने कहा कि वह राजनीतिक लड़ाई से पीछे हटने वाली नहीं हैं और भाजपा को सत्ता से हटाने तक संघर्ष जारी रखेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि हालिया विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर मतगणना के दौरान अनियमितताएं हुईं, जिसके कारण उनकी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा।
हालांकि, इस धरने के दौरान TMC की एकजुटता पर सवाल भी उठे। पार्टी के 80 विधायकों में से केवल 8 विधायक ही धरना स्थल पर मौजूद दिखाई दिए। वहीं, 6 सांसदों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। राजनीतिक गलियारों में इसे पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
धरने में शामिल प्रमुख विधायकों में सोभनदेब चट्टोपाध्याय, मदन मित्रा, अशोक देब, असीमा पात्रा, बिमान बनर्जी, फिरहाद हकीम और कुणाल घोष शामिल रहे। वहीं सांसदों में डेरेक ओ’ब्रायन, कल्याण बनर्जी, डोला सेन, समीरुल इस्लाम, मेनका गुरुस्वामी और नदीमुल हक मौजूद रहे।
इस बीच भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने धरने पर तंज कसते हुए कहा कि कार्यक्रम में पार्टी के गिने-चुने विधायक और सांसद ही पहुंचे, जो TMC की वर्तमान स्थिति को दर्शाता है।
उधर, TMC से निलंबित प्रवक्ता रिजू दत्ता ने दावा किया कि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ विधायक स्वयं को “असली तृणमूल कांग्रेस” मानते हैं और पार्टी नेतृत्व में बदलाव चाहते हैं। दत्ता के अनुसार, करीब 50 विधायक पार्टी के भविष्य को लेकर अलग रणनीति पर विचार कर रहे हैं।
धरने को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने भाजपा पर राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने भ्रष्टाचार के मामलों में हुई गिरफ्तारियों और कार्यकर्ताओं पर कथित दबाव का भी मुद्दा उठाया।
ममता बनर्जी ने आगामी INDIA गठबंधन की बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा के खिलाफ देशव्यापी रणनीति तैयार की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही सभी विपक्षी दल एक साझा कार्ययोजना की घोषणा करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए ममता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक माहौल प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश की जा रही है।
विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन को लेकर TMC विधायकों के हस्ताक्षरों पर उठे विवाद पर भी ममता ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी को हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर संदेह है तो उनकी फोरेंसिक जांच कराई जा सकती है।
अपने संबोधन के अंत में ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि भाजपा के खिलाफ उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और पार्टी कार्यकर्ताओं को संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए।