UP News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी संगठन से लेकर सरकार तक लगातार ऐसे संकेत दिए जा रहे हैं कि भाजपा तीसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरने जा रही है। हालांकि, इस मिशन के सामने 61 विधानसभा सीटें सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं।
दरअसल, उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में 61 ऐसी सीटें हैं, जहां भाजपा को लगातार तीन चुनाव—2012, 2017 और 2022—में हार का सामना करना पड़ा। यही वजह है कि पार्टी अब इन सीटों पर खास फोकस कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी नेताओं और संगठन पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे चुनावी अभियान के शुरुआती चरण में इन कठिन सीटों पर विशेष ध्यान दें। पार्टी का मानना है कि अगर इन सीटों पर पकड़ मजबूत हुई तो 2027 का रास्ता और आसान हो सकता है।
बूथ स्तर पर तैयारी शुरू
भाजपा इन सीटों पर बूथ स्तर तक डेटा जुटाने में लगी है। पार्टी जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दों और वोटिंग पैटर्न का विश्लेषण कर रही है ताकि हर सीट के हिसाब से अलग रणनीति बनाई जा सके।
इन 61 सीटों में 22 सीटें पूर्वांचल क्षेत्र में हैं। इनमें आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर जैसे जिले शामिल हैं। वहीं 13 सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुरादाबाद और बिजनौर क्षेत्र में आती हैं।
मुस्लिम बहुल इलाकों पर नजर
इन सीटों में बड़ी संख्या मुस्लिम बहुल इलाकों की मानी जाती है। 2022 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने पूर्वी और पश्चिमी यूपी की इन 35 सीटों में से 27 पर जीत दर्ज की थी।
हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि स्वार, रामपुर और कुंदरकी उपचुनाव में मिली जीत से पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ा है। भाजपा का मानना है कि जिन इलाकों को पहले उसके लिए मुश्किल माना जाता था, वहां अब राजनीतिक माहौल बदल रहा है।
सहयोगियों से बढ़ी उम्मीद
भाजपा को अपने सहयोगी दलों से भी काफी उम्मीदें हैं। ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) और जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल (RLD) अब NDA के साथ हैं।
2022 चुनाव में दोनों दल समाजवादी पार्टी गठबंधन का हिस्सा थे, जिसका असर भाजपा के प्रदर्शन पर पड़ा था। 2017 में 312 सीटें जीतने वाली भाजपा 2022 में 255 सीटों पर सिमट गई थी।
अब भाजपा को उम्मीद है कि राजभर और RLD के साथ आने से पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर जातीय समीकरण उसके पक्ष में जा सकते हैं। इसी रणनीति के तहत पार्टी अभी से इन 61 सीटों पर सामाजिक और राजनीतिक गणित साधने में जुट गई है।



