न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़: भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए वरिष्ठ नेता और उद्योगपति Keval Singh Dhillon को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। खास बात यह है कि ढिल्लों कुछ वर्ष पहले ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। पार्टी का यह फैसला पंजाब की राजनीति में अहम माना जा रहा है।
भाजपा ने पहली बार किसी जाट सिख चेहरे को पंजाब प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। राजनीतिक जानकार इसे आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर लिया गया रणनीतिक फैसला मान रहे हैं।
मालवा क्षेत्र पर भाजपा की नजर
केवल सिंह ढिल्लों पंजाब के सबसे प्रभावशाली माने जाने वाले मालवा क्षेत्र से आते हैं। यह इलाका राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से 69 सीटें इसी क्षेत्र में आती हैं।
भाजपा लंबे समय से मालवा बेल्ट में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। माना जाता है कि पंजाब में सरकार बनाने के लिए इस क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन बेहद जरूरी होता है।
ढिल्लों का राजनीतिक प्रभाव संगरूर इलाके में भी माना जाता है, जो वर्तमान मुख्यमंत्री Bhagwant Mann का भी गृह क्षेत्र है।
कारोबारी और किसान दोनों पहचान
केवल सिंह ढिल्लों की पहचान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। वह बड़े उद्योगपति होने के साथ-साथ किसान भी हैं। उन्होंने ढिल्लों समूह के जरिए पेय पदार्थों का बड़ा कारोबार खड़ा किया और बाद में कई अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार किया।
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बताया जाता है कि 1980 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के दौर के दौरान उन्होंने राज्य में पेप्सिको जैसी बड़ी कंपनी को निवेश के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे
ढिल्लों बरनाला विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 2007 और 2012 में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें पार्टी की प्रदेश इकाई का उपाध्यक्ष भी बनाया गया था।
सुनील जाखड़ की जगह मिली जिम्मेदारी
ढिल्लों ने Sunil Jakhar का स्थान लिया है, जिन्हें जुलाई 2023 में पंजाब भाजपा अध्यक्ष बनाया गया था। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के भीतर लंबे समय से किसी सिख चेहरे को प्रदेश नेतृत्व देने की मांग उठ रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भाजपा महासचिव Tarun Chugh समेत कई वरिष्ठ नेताओं का समर्थन केवल सिंह ढिल्लों को प्राप्त था।
पंजाब की राजनीति में अहम माना जा रहा फैसला
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह कदम पंजाब में सिख और किसान समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी फिलहाल विधानसभा में केवल दो सीटों तक सीमित है, ऐसे में आगामी चुनाव उसके लिए बड़ी चुनौती माने जा रहे हैं।
मालवा क्षेत्र में मजबूत चेहरा सामने लाकर भाजपा राज्य की राजनीति में नई जमीन तैयार करने की कोशिश कर रही है।



