न्यूज़ डेक्स/सर्वोदय न्यूज़:- भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान पर सफाई पेश की है। उन्होंने कहा कि उनकी मौखिक टिप्पणी को मीडिया के एक वर्ग ने गलत तरीके से पेश किया और उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने कहा कि उन्होंने देश के युवाओं की आलोचना नहीं की थी, बल्कि उन लोगों पर टिप्पणी की थी जो फर्जी और नकली डिग्रियों के जरिए प्रतिष्ठित पेशों में प्रवेश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “मुझे यह देखकर दुख हुआ कि मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जिन्होंने फर्जी डिग्रियों के जरिए वकालत जैसे पेशों में जगह बनाई है।”
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की एक टिप्पणी चर्चा में आ गई थी। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्होंने कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” से की और कहा कि ऐसे लोग आगे चलकर मीडिया, सोशल मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बनकर व्यवस्था पर हमला करते हैं।
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इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और कई लोगों ने इसे युवाओं का अपमान बताया।
CJI ने क्या कहा?
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि उनका इशारा युवाओं की ओर नहीं था। उन्होंने कहा कि समाज के कई प्रतिष्ठित क्षेत्रों में ऐसे लोग घुसपैठ कर चुके हैं जो गलत तरीकों से आगे बढ़े हैं और वे “परजीवियों” की तरह व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के युवाओं के खिलाफ टिप्पणी करने का सवाल ही नहीं उठता और मीडिया में जो रिपोर्टिंग हुई, वह भ्रामक थी।
सोशल मीडिया पर जारी है बहस
इस बयान और उसके बाद आई सफाई को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। एक पक्ष CJI की सफाई को सही ठहरा रहा है, जबकि कुछ लोग मानते हैं कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को शब्दों का चयन बेहद सावधानी से करना चाहिए।



