लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़: योगी आदित्यनाथ सरकार 1 मई 2026 से प्रदेशभर में एक बड़ा शिक्षा अभियान शुरू करने जा रही है। इस विशेष अभियान के तहत टीमें श्रमिक बस्तियों, ईंट-भट्ठों और झुग्गी-झोपड़ियों तक पहुंचकर ऐसे बच्चों की पहचान करेंगी जो अब तक स्कूल से बाहर हैं या पढ़ाई छोड़ चुके हैं।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य आउट-ऑफ-स्कूल और ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। खास तौर पर दिव्यांग बच्चों की पहचान कर उन्हें स्पेशल एजुकेटर की मदद से स्कूलों में दाखिला दिलाया जाएगा। वहीं पढ़ाई छोड़ चुकी बालिकाओं को प्राथमिकता के आधार पर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाएगा।
‘स्कूल चलो अभियान’ को मिलेगा नया विस्तार
बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ नामांकन बढ़ाना नहीं, बल्कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि ‘स्कूल चलो अभियान’ को जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए।
अधिकारियों को सख्त निर्देश
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हर पात्र बच्चे का नामांकन सुनिश्चित किया जाए। अभियान के पहले चरण (1 से 15 अप्रैल) में छोटे बच्चों का आंगनबाड़ी/बाल वाटिका में नामांकन और 7 से 14 वर्ष के ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान शुरू हो चुकी है।
अब दूसरे चरण में इसे और तेज करते हुए छूटे हुए बच्चों तक सीधे पहुंच बनाई जाएगी। साथ ही कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 तक 100% ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी बच्चा बीच में पढ़ाई न छोड़े।
आरटीई और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
सरकार ने आरटीई के तहत निजी स्कूलों में चयनित बच्चों का 100 प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। इसके अलावा ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ और ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ के जरिए स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।
सभी विद्यालयों को ‘विद्यांजलि पोर्टल’ से जोड़कर उनकी जरूरतों का आकलन किया जाएगा और स्वयंसेवी संस्थाओं व वालंटियर्स की मदद से सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।