नई दिल्ली/लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर अब सियासी घमासान भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी दिखाई देने लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने इन नियमों को पूरी तरह असंवैधानिक बताते हुए सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की है।
कलराज मिश्र ने कहा कि एससी-एसटी के साथ होने वाले भेदभाव को लेकर पहले से ही 2012 की गाइडलाइंस मौजूद थीं, जिनके तहत शिकायत की व्यवस्था थी। अब नए नियमों में ओबीसी को भी जोड़ दिया गया है, लेकिन समस्या यह है कि शिकायत का अधिकार जाति आधारित कर दिया गया है। उनका कहना है कि जाति के आधार पर अलग-अलग प्रावधान बनाने के बजाय हर उस व्यक्ति को शिकायत का अधिकार मिलना चाहिए, जिसके साथ भेदभाव हो रहा है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नए नियमों में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ किसी तरह के दंड का प्रावधान नहीं है, जो गंभीर चिंता का विषय है। कलराज मिश्र ने दो टूक कहा कि यह व्यवस्था न केवल असंतुलित है बल्कि संविधान की भावना के भी खिलाफ है।
देशभर में UGC नियमों का विरोध
गौरतलब है कि यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ इस समय देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। यूजीसी ने इन नियमों को उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से लागू करने की बात कही है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि इससे उलटा भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा।
दो दिन पहले बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री भी इन नियमों के खिलाफ मुखर होकर सामने आए थे। वहीं, सामान्य वर्ग के प्रदर्शनकारी लगातार जनप्रतिनिधियों पर दबाव बना रहे हैं कि वे इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करें।
अब तक इस विषय पर अधिकांश राजनीतिक दलों के नेता चुप्पी साधे हुए थे, लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र के बयान से यूजीसी नियमों का विरोध कर रहे लोगों को नई ताकत मिली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर से उठी यह आवाज आने वाले दिनों में सरकार के लिए दबाव बढ़ा सकती है।



