लाइफस्टाइल/सर्वोदय न्यूज़:- आज के दौर में तनाव और भागदौड़ से भरी जिंदगी में सेहत से जुड़ी कई समस्याएं सामने आ रही हैं। इन्हीं में से एक है हाथ कांपना – जिसे मेडिकल भाषा में “ट्रेमर” (Tremor) कहा जाता है। यह केवल कमजोरी या थकान का नतीजा नहीं, बल्कि यह न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर यानी तंत्रिका तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है।
हाथ कांपना क्यों होता है? जानिए मुख्य कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक, हाथों में कंपन या थरथराहट के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
- अत्यधिक तनाव: तनाव की स्थिति में शरीर में एड्रेनालिन हार्मोन बढ़ जाता है, जिससे हाथ कांपने लगते हैं।
- कैफीन का अधिक सेवन: चाय-कॉफी जैसे कैफीन युक्त पेय नसों को उत्तेजित कर ट्रेमर का कारण बन सकते हैं।
- न्यूरोलॉजिकल समस्याएं: ब्रेन या नर्व सिस्टम से जुड़ी बीमारी जैसे पार्किंसन, थायरॉइड, या मल्टीपल स्क्लेरोसिस।
- शराब या ड्रग्स का सेवन और अचानक छोड़ना।
- थकान या नींद की कमी।
नजरअंदाज न करें ये लक्षण
अगर नीचे दिए लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें:
- लिखने या खाने में परेशानी
- हाथ से चीजें बार-बार गिरना
- बिना थकान के भी लगातार हाथों में कंपन
- सिर, पैर या हाथों का अपने आप हिलना
क्या है इससे बचाव? अपनाएं ये जरूरी उपाय
हाथ कांपने की समस्या को नियंत्रित करने के लिए जीवनशैली में ये बदलाव बेहद जरूरी हैं:
- तनाव प्रबंधन – योग, प्राणायाम और ध्यान को रोजाना की दिनचर्या में शामिल करें।
- कैफीन से परहेज – चाय, कॉफी और एनर्जी ड्रिंक से दूरी बनाएं।
- नियमित व्यायाम – शारीरिक सक्रियता मांसपेशियों को मजबूत बनाती है।
- नींद पूरी लें – दिन में 7-8 घंटे की नींद बेहद जरूरी है।
- नशे से दूरी – शराब और अन्य नशे कंपन को और बढ़ा सकते हैं।
कब बनती है यह समस्या खतरनाक?
अगर ट्रेमर लगातार बढ़ रहा है और रोजमर्रा के कार्य जैसे खाना खाना, कपड़े पहनना या लिखना मुश्किल हो रहा है, तो यह पार्किंसन डिजीज, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर या थायरॉइड जैसी बीमारी का संकेत हो सकता है।



