स्पोर्ट्स डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- भारतीय क्रिकेट टीम के उभरते सितारे तिलक वर्मा ने हाल ही में अपने जीवन के सबसे कठिन दौर के बारे में खुलासा किया है। ‘ब्रेकफास्ट विद चैंपियंस’ के ताज़ा एपिसोड में उन्होंने बताया कि 2022 में बांग्लादेश दौरे के दौरान उन्हें ‘रैबडोमायोलिसिस (Rhabdomyolysis)’ नाम की एक गंभीर और जानलेवा बीमारी हो गई थी।
यह बीमारी उनकी मांसपेशियों पर इतना असर डाल गई कि उनका शरीर पूरी तरह अकड़ गया था। यहां तक कि उंगलियां हिलना बंद हो गईं, जिसके चलते ग्लव्स को काटकर निकालना पड़ा।
“अगर कुछ देर और होती, तो जान जा सकती थी” — डॉक्टर
तिलक ने बताया कि उस समय हालत इतनी गंभीर थी कि डॉक्टरों ने साफ कह दिया था —“अगर कुछ घंटे और देरी हो जाती, तो बात आपकी जान तक पहुंच सकती थी।”
मुंबई इंडियंस के मालिक आकाश अंबानी और पूर्व बीसीसीआई सचिव जय शाह की मदद से उनका समय रहते अस्पताल में इलाज हुआ। तिलक ने कहा कि बीसीसीआई ने भी तुरंत एक्शन लिया, जिससे उनकी जान बच गई।
क्या है ‘रैबडोमायोलिसिस’?
रैबडोमायोलिसिस एक दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति है, जिसमें मांसपेशियां टूटने लगती हैं और उनके टॉक्सिन्स (विषैले तत्व) खून में घुल जाते हैं। इससे किडनी फेल्योर, मांसपेशियों में जकड़न, और ब्लड फ्लो रुकने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इस बीमारी की वजह अक्सर ओवर-ट्रेनिंग, थकावट, या डिहाइड्रेशन होती है।
“मैं सबसे फिट खिलाड़ी बनना चाहता था” — तिलक वर्मा
तिलक ने बताया कि अपने पहले आईपीएल सीजन के बाद वे लगातार मेहनत कर रहे थे।“मैं फिट रहना चाहता था, इसलिए आराम के दिनों में भी जिम जाता था। मैं आईस बाथ लेता था लेकिन रिकवरी पर ध्यान नहीं देता था। इससे मांसपेशियों पर बहुत दबाव पड़ा और वे टूट गईं।”
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उन्होंने आगे कहा,“जब मैं शतक की ओर बढ़ रहा था, मेरी आंखों से अपने आप आंसू आने लगे। उंगलियां काम करना बंद कर गईं। सब कुछ पत्थर जैसा महसूस हो रहा था।”
अस्पताल में बेहद गंभीर हालात
तिलक ने बताया कि अस्पताल पहुंचने के बाद आईवी लाइन लगाने में भी दिक्कत हो रही थी, क्योंकि नसें अकड़ चुकी थीं।“सुई अंदर नहीं जा रही थी, सुई टूट रही थी। माँ मेरे साथ थीं और वो पूरी तरह से घबरा गई थीं।”
अब पूरी तरह फिट, भारत के लिए चमक रहे हैं तिलक
तिलक वर्मा अब पूरी तरह फिट हैं और एशिया कप 2025 में उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ शानदार प्रदर्शन कर भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी कहानी आज युवाओं के लिए एक प्रेरणा है कि फिटनेस के साथ रिकवरी भी उतनी ही जरूरी है।



