सिरोही(राजस्थान)/सर्वोदय:- सिरोही रियासत की प्राचीन राजधानी रही चंद्रावती नगरी के पास स्थित मां चामुंडा मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है और श्रद्धालुओं की अपार आस्था का केंद्र बना हुआ है।
इतिहास से जुड़ी गहराई: परमार और देवड़ा राजवंशों की छाया में चंद्रावती
चंद्रावती नगरी एक समय सिरोही रियासत की राजधानी रही है। इस ऐतिहासिक नगरी पर परमार और देवड़ा शासकों का राज रहा। माना जाता है कि इसी कालखंड में मां चामुंडा का यह मंदिर अस्तित्व में आया। स्थानीय निवासी गणेश देवासी के अनुसार, यह मंदिर बेहद प्राचीन है और गांव के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी इसकी गहरी मान्यता है।
100 वर्ष से भी पुराना मंदिर, हाल ही में हुआ जीर्णोद्धार
वर्तमान मंदिर की संरचना करीब 100 साल पुरानी मानी जाती है। समय के साथ प्रतिमा का कुछ हिस्सा खंडित हो गया था, जिसे लेकर अक्टूबर 2024 में संतों के सान्निध्य में प्राण प्रतिष्ठा की गई। इस दौरान मंदिर का जीर्णोद्धार भी करवाया गया। हर वर्ष यहां मंदिर का वार्षिक मेला आयोजित होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
पहुंचना हुआ आसान, मंदिर तक बना वाहन मार्ग
मंदिर तक पहले श्रद्धालुओं को लगभग 150 सीढ़ियां चढ़कर जाना पड़ता था। लेकिन अब एनएच-27 से चंद्रावती गांव होते हुए वाहनों के लिए सीधा रास्ता बना दिया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में आसानी होती है। रास्ते में स्थित गौशाला में दो दर्जन से अधिक गायों की सेवा की जाती है।
पास ही है चंद्रावती की ऐतिहासिक नगरी और वॉच टावर
मंदिर के पास ही स्थित है चंद्रावती की प्राचीन नगरी, जो 12वीं से 14वीं शताब्दी के दौरान अपने वैभव के लिए प्रसिद्ध थी। यह नगरी कभी गुजरात जाने वाले मार्ग पर पड़ती थी और इसलिए मुगल आक्रांताओं द्वारा कई बार लूटी गई।
पुरातत्व विभाग द्वारा की गई खुदाई में यहां से कई प्राचीन मंदिरों के अवशेष, मूर्तियाँ और स्थापत्य के नमूने प्राप्त हुए हैं, जो आज चंद्रावती म्यूजियम और माउंट आबू के राजभवन म्यूजियम में संरक्षित हैं।
आस्था और इतिहास का संगम
मां चामुंडा का चंद्रावती मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम है। नवरात्रि जैसे पर्वों पर यह स्थल हजारों भक्तों की आस्था का केंद्र बन जाता है। यदि आप सिरोही या माउंट आबू की यात्रा पर हैं, तो इस मंदिर के दर्शन करना न भूलें।



