लाइफस्टाइल/सर्वोदय न्यूज़:- जब भी हम ‘चिकित्सक’ शब्द सुनते हैं, तो हमारे मन में मानव डॉक्टर की छवि बनती है। लेकिन एक और वर्ग है जो निःस्वार्थ भाव से जीवों की सेवा में समर्पित रहता है—वो हैं पशु चिकित्सक। पशु चिकित्सक न केवल जानवरों का इलाज करते हैं, बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता को सुधारने, पशुपालकों की आजीविका बचाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एक पशु चिकित्सक का दैनिक जीवन
पशु चिकित्सक का दिन सूरज उगने से पहले ही शुरू हो जाता है। सुबह-सवेरे से ही क्लिनिक में केस आना शुरू हो जाते हैं—कभी कोई गाय दूध नहीं दे रही, तो कभी किसी पालतू कुत्ते को उल्टी-दस्त हो गया है। गाँवों में स्थित पशु चिकित्सक कभी-कभी खेतों में जाकर पशुओं का इलाज करते हैं।
डॉ. हेमंत तिवारी के अनुसार, “हर दिन नया होता है, नए केस, नई चुनौतियाँ, लेकिन हर इलाज के बाद जब जानवर की हालत सुधरती है और पशुपालक के चेहरे पर राहत की मुस्कान आती है, तो सारे थकान भूल जाते हैं।”
सेवा का भाव: सिर्फ पेशा नहीं, जुनून
कई बार पशु चिकित्सकों को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है—गाँवों में चिकित्सा संसाधनों की कमी, बारिश में कीचड़ भरे रास्ते, और असहयोगी माहौल। लेकिन यह उनके सेवा के भाव को कम नहीं करता। पशुओं को इंसानों की तरह अपनी पीड़ा कहने का माध्यम नहीं होता, ऐसे में पशु चिकित्सक उनके हावभाव, बॉडी लैंग्वेज और लक्षणों के माध्यम से उनका इलाज करते हैं। डॉ. तिवारी बताते हैं, “पशु बोल नहीं सकते, पर हम उनकी आँखों में दर्द पढ़ सकते हैं। यही हमें और सतर्क बनाता है।”
समाज के लिए योगदान
पशु चिकित्सकों का काम केवल जानवरों तक सीमित नहीं है। वे वन्यजीव संरक्षण, पशुधन विकास, रेबीज जैसी जानलेवा बीमारियों की रोकथाम, और दूध, मांस, अंडों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में भी योगदान करते हैं। COVID-19 महामारी के दौरान, जब ज़्यादातर लोग अपने घरों में सुरक्षित थे, पशु चिकित्सक फ़ील्ड में थे—जानवरों की देखभाल करते हुए, ज़ूनोटिक बीमारियों (जो इंसानों में फैल सकती हैं) पर निगरानी रखते हुए। यह दिखाता है कि यह पेशा न केवल समर्पण की माँग करता है, बल्कि समाज के प्रति बड़ी ज़िम्मेदारी भी निभाता है।
संघर्ष और चुनौतियाँ
पशु चिकित्सा के क्षेत्र में काम करना जितना भावनात्मक रूप से संतोषजनक है, उतना ही शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण भी। डॉ. तिवारी बताते हैं कि आज भी कई जगह पशु चिकित्सकों को उचित सम्मान और संसाधन नहीं मिलते। एक मानव डॉक्टर को जहाँ आधुनिक तकनीक और स्टाफ़ की सुविधा मिलती है, वहीं पशु चिकित्सकों को कई बार बिना सहायता के मवेशियों के बीच काम करना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, किसी गाय को डिलीवरी करानी हो या जंगली जानवर के ज़ख्म पर पट्टी करनी हो, अक्सर चिकित्सक को अपने ही संसाधनों से काम चलाना पड़ता है।
परिवार और निजी जीवन पर प्रभाव
एक पशु चिकित्सक के लिए व्यक्तिगत जीवन और पेशेवर जीवन को संतुलित करना आसान नहीं होता। अचानक किसी बीमारी का केस आ जाना, किसी किसान की जानवर मरने की कगार पर हो, तो सब कुछ छोड़कर दौड़ पड़ना पड़ता है। यह ज़िम्मेदारी का काम है, जिसमें छुट्टियाँ भी कम ही मिलती हैं। डॉ. तिवारी कहते हैं, “जब समाज सो रहा होता है, हम किसी जानवर को बचाने में लगे होते हैं। यह पेशा सिर्फ नौकरी नहीं, तपस्या है।”
पशुपालकों और पालतू प्रेमियों की उम्मीद
आज के समय में जब लोग अपने पालतू जानवरों को परिवार का हिस्सा मानते हैं, वहाँ पशु चिकित्सकों की ज़िम्मेदारी और बढ़ गई है। एक छोटी सी ग़लती भी जानवर की जान ले सकती है। इसीलिए सही डायग्नोसिस, सही इलाज और समय पर सलाह बहुत ज़रूरी हो जाती है। डॉ. तिवारी मानते हैं कि “एक अच्छा पशु चिकित्सक वही है जो इलाज के साथ-साथ पशुपालक को सही दिशा भी दे सके।”
भविष्य की दिशा
आने वाले समय में पशु चिकित्सा का क्षेत्र और अधिक उन्नत और तकनीकी बनने जा रहा है। टेलीमेडिसिन, मोबाइल क्लिनिक, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए यंत्र इस सेवा को अधिक सुलभ बनाएंगे। लेकिन इसका मूल तत्व—सेवा और करुणा—हमेशा केंद्र में रहेगा।
डॉ. तिवारी का सपना है कि हर गाँव, हर शहर में प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों की टीम हो जो पशुओं की सुरक्षा और समाज के स्वास्थ्य की रक्षा करे।



