संभल/सर्वोदय न्यूज़: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर दान प्रकरण में दर्ज एफआईआर को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में केवल छोटे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जबकि कथित रूप से जिम्मेदार बड़े लोगों को जांच के दायरे से बाहर रखा गया है।
संभल में अपनी ‘गौ धर्म यात्रा’ के दौरान पत्रकारों से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राम मंदिर से जुड़े निर्णय शुरू से ही पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं लिए गए। उनका कहना था कि ट्रस्ट के गठन में संतों, शंकराचार्यों और धर्माचार्यों की बजाय राजनीतिक रूप से चयनित लोगों को प्राथमिकता दी गई।
‘नोट गिनने वालों पर कार्रवाई, बड़े लोगों पर सवाल नहीं’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार एफआईआर उन लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है जो चढ़ावे की राशि की गणना करते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कथित तौर पर बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल नोट गिनने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई से पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आएगी और निष्पक्ष जांच के लिए सभी स्तरों पर जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
‘आरोपों की जांच जरूरी’
उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार यदि मामले में कोई आधार नहीं होता तो जांच की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि जांच के बाद एफआईआर दर्ज होना इस बात का संकेत है कि मामले में तथ्यों की पड़ताल जरूरी समझी गई।
भाजपा के हिंदुत्व पर भी उठाए सवाल
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भारतीय जनता पार्टी के हिंदुत्व को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग वेदों और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं का पालन नहीं करते, वे वास्तविक हिंदुत्व का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते।
हालांकि, उन्होंने संभल में प्राचीन धार्मिक स्थलों के विकास के प्रयासों का स्वागत किया, लेकिन वाराणसी में मंदिरों से जुड़े कुछ मुद्दों पर राज्य सरकार की आलोचना भी की।
गौ धर्म यात्रा का उद्देश्य बताया
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि वह 3 मई से ‘गौ धर्म यात्रा’ पर हैं। उनका कहना है कि यात्रा का उद्देश्य लोगों को गौ-संरक्षण के प्रति जागरूक करना और ऐसे जनप्रतिनिधियों का समर्थन करने के लिए प्रेरित करना है जो इस विषय पर स्पष्ट प्रतिबद्धता रखते हों।
उन्होंने यह भी कहा कि इस यात्रा का मकसद किसी राजनीतिक दल का समर्थन करना नहीं है। उनके अनुसार यदि कोई भी दल गौ-संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाता है तो उसे इसका राजनीतिक लाभ मिल सकता है।



