न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण विधायकों की बैठक बुलाकर सुर्खियों में आए भाजपा विधायक पीएन पाठक एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह उनकी कोई बैठक नहीं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर किया गया एक ट्वीट है, जिसे सियासी हलकों में अलग-अलग संकेतों के रूप में देखा जा रहा है।
संस्कृत श्लोक और उसके बाद लिखे गए शब्दों ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। पाठक के इस डिजिटल संदेश को उनके हालिया कदमों से जोड़कर देखा जा रहा है।
संस्कृत श्लोक से की शुरुआत
पीएन पाठक ने अपने ट्वीट की शुरुआत एक संस्कृत श्लोक से की—
“नाऽहं कामये राज्यं, न स्वर्गं, न च पुनर्भवम्।
कामये दुःखतप्तानां, प्राणिनाम् आर्तिनाशनम्।।”
नाऽहं कामये राज्यं, न स्वर्गं, न च पुनर्भवम् ।
कामये दुःखतप्तानां, प्राणिनाम् आर्तिनाशनम्।।ब्राह्मण का कर्तव्य सत्ता या स्वार्थ नहीं, बल्कि समाज को दिशा देना है।
सत्य बोलना, अन्याय का प्रतिकार करना और लोककल्याण के लिए निर्भीक खड़ा होना ही ब्राह्मणत्व है।
यही सनातन परंपरा का मूल…— P.N. Pathak (@PNPathakBJP) January 12, 2026
अर्थात, उन्हें न सत्ता की इच्छा है, न स्वर्ग और न मोक्ष की। उनका उद्देश्य केवल पीड़ित और दुखी लोगों के कष्टों का निवारण करना है। इस श्लोक के जरिए पाठक ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उनका फोकस व्यक्तिगत लाभ या पद पर नहीं, बल्कि जनकल्याण पर है।
‘अन्याय का प्रतिकार’ पर जोर
ट्वीट के अगले हिस्से में विधायक ने लिखा कि ब्राह्मण का कर्तव्य सत्ता या स्वार्थ नहीं, बल्कि समाज को दिशा देना है। सत्य बोलना, अन्याय के खिलाफ खड़ा होना और लोकहित के लिए निर्भीक रहना ही ब्राह्मणत्व का सार है। उन्होंने इसे सनातन परंपरा का मूल संदेश बताया।
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यही पंक्तियां राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
राजनीतिक संकेतों की तलाश
पीएन पाठक के इस संदेश को हाल ही में हुई ब्राह्मण विधायकों की बैठक से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्वीट उस बैठक को एक वैचारिक आधार देने की कोशिश हो सकता है।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह पार्टी नेतृत्व को यह संकेत देने का प्रयास है कि ब्राह्मण समाज और उसके प्रतिनिधि अपनी उपेक्षा को लेकर अब खुलकर बात करना चाहते हैं।
पहले ही बढ़ चुकी है सियासी तपिश
गौरतलब है कि पिछले महीने पीएन पाठक ने करीब एक दर्जन ब्राह्मण विधायकों के साथ बैठक की थी। हालांकि इसे औपचारिक मुलाकात बताया गया था, लेकिन सत्ता के गलियारों में इसे ब्राह्मण लॉबी की सक्रियता के तौर पर देखा गया। इस बैठक को लेकर पार्टी के शीर्ष स्तर से नाराजगी भी सामने आई थी और जातिगत आधार पर इस तरह की गतिविधियों से बचने की नसीहत दी गई थी।
ट्वीट से बढ़ा दबा असंतोष?
अब पाठक के इस ट्वीट को उसी घटनाक्रम की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। ‘निर्भीक होकर अन्याय का प्रतिकार’ जैसे शब्दों को पार्टी के भीतर मौजूद असंतोष की अभिव्यक्ति माना जा रहा है।
कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक के इस संदेश ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश भाजपा के भीतर ब्राह्मणों की भूमिका, हिस्सेदारी और सम्मान का मुद्दा और मुखर हो सकता है।



