Friday, March 27, 2026

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SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग, BJP नेता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-राज्यों से मांगा जवाब

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- देश में आरक्षण व्यवस्था को लेकर लंबे समय से बहस जारी है। इसी कड़ी में अब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के आरक्षण में भी ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने की मांग उठी है। इस संबंध में भाजपा नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

सोमवार (12 जनवरी) को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मुद्दे पर सरकारों से अपना पक्ष रखने को कहा। याचिका में मांग की गई है कि SC/ST आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं लोगों तक सीमित रहे, जो वास्तव में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं।

क्या है याचिका का तर्क?

याचिकाकर्ता का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में SC/ST वर्ग के अपेक्षाकृत संपन्न परिवार आरक्षण का लाभ ले रहे हैं, जबकि अत्यंत गरीब और वंचित तबके इससे बाहर रह जाते हैं। याचिका में दलील दी गई है कि जिन SC/ST परिवारों का कोई सदस्य सरकारी या संवैधानिक पद पर पहुंच चुका है, उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।

अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि आरक्षण का मूल उद्देश्य समाज के सबसे कमजोर और हाशिए पर खड़े लोगों को आगे बढ़ाना था, लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था कुछ चुनिंदा परिवारों तक सिमट कर रह गई है।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर गंभीरता दिखाते हुए केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकारों का क्या दृष्टिकोण है।

‘आरक्षण 10 साल के लिए था’

याचिका के समर्थन में यह भी कहा गया कि संविधान में आरक्षण की व्यवस्था मूल रूप से 10 वर्षों के लिए की गई थी, ताकि समाज के पीड़ित, शोषित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाया जा सके। याचिकाकर्ता का तर्क है कि आरक्षण का लाभ झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले, आदिवासी और अत्यंत गरीब लोगों के लिए था, न कि करोड़पति या संपन्न वर्ग के लिए।

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उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि एक व्यक्ति पहले SC/ST आरक्षण के तहत IAS अधिकारी बनता है, फिर नौकरी छोड़कर आरक्षित सीट से सांसद या विधायक बनता है और आगे मंत्री पद तक पहुंच जाता है, जबकि उसी वर्ग के अन्य गरीब लोग अवसर से वंचित रह जाते हैं।

अब इस मामले पर केंद्र और राज्य सरकारों के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट आगे की सुनवाई करेगा।

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