न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहराए जाने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कार्यक्रम को संबोधित किया। 161 फीट ऊंचाई पर केसरिया ध्वज के आरोहण के इस ऐतिहासिक क्षण को भागवत ने उन महान व्यक्तित्वों के संघर्ष से जोड़ा, जिन्होंने जीवन भर राम मंदिर निर्माण का सपना देखा, लेकिन उसे साकार होता नहीं देख सके।
भागवत ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण अब पूर्णता को प्राप्त कर चुका है और यह दृश्य निश्चित ही उन सभी आत्माओं को तृप्ति प्रदान करेगा, जिन्होंने मंदिर आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विशेष रूप से विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल, महंत रामचंद्र दास परमहंस और विष्णु हरि डालमिया को याद करते हुए कहा कि “आज उनकी आत्माएं संतोष महसूस कर रही होंगी।”
संघ प्रमुख ने यह भी बताया कि फहराया गया यह धर्म ध्वज वही प्रतीक है जो रामराज्य के दौरान आकाश में लहराया करता था।
“इतिहास गवाह है— निरंतरता हो तो लक्ष्य अवश्य मिलता है”
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने हिंदू समाज की दीर्घकालिक एकता और संघर्ष की भावना को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के तप, विश्वास और सतत प्रयासों के बाद आज यह ध्वज अयोध्या के आकाश में लहराया है, जो धैर्य और दृढ़ संकल्प की मिसाल है।
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भागवत ने कहा-“हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि यह धर्म ध्वजा और ऊँची प्रतिष्ठा हासिल करे। हमें ऐसा समाज बनाना है जिसमें समरसता हो, एकता हो और देश समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छुए।”
उन्होंने सूर्य और भगवान कृष्ण के उदाहरण देते हुए कहा कि प्रकृति की तरह जीवन की प्रक्रियाएं कभी नहीं रुकतीं। सूर्य प्रतिदिन उदय और अस्त होता है, लेकिन उसकी गति थमती नहीं। इसी प्रकार हिंदू समाज भी रुकने वाला नहीं रहा और निरंतर प्रयासों ने आज इस ऐतिहासिक दिन तक पहुंचाया है।



