न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- राजधानी लखनऊ में मंगलवार को एक बार फिर गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल देखने को मिली। मॉल एवेन्यू स्थित दादा मियां की दरगाह पर वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष दुआ का आयोजन किया गया। इस मौके पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग एक साथ नजर आए और संत के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
चादर चढ़ाकर की गई दुआ
इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने दरगाह पर चादर चढ़ाई और प्रेमानंद महाराज की लंबी उम्र और जल्द स्वास्थ्य लाभ के लिए दुआ की। दरगाह परिसर में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग भी मौजूद थे, जिनके हाथों में संत प्रेमानंद की तस्वीरें थीं। पूरे माहौल में आपसी भाईचारे और इंसानियत की भावनाएं साफ झलक रही थीं।
“महाराज इंसान को इंसान समझते हैं” — मोहम्मद अखलाक
दुआ के बाद समाजसेवी मोहम्मद अखलाक ने कहा:“प्रेमानंद महाराज जैसे लोग समाज को जोड़ते हैं, वो कभी हिंदू या मुसलमान नहीं देखते, केवल इंसानियत को महत्व देते हैं। जब से उनके अस्वस्थ होने की खबर मिली है, मन दुखी है। हम लगातार दुआ मांग रहे हैं कि वह शीघ्र स्वस्थ होकर लोगों को फिर से आशीर्वाद दें।”
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उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रार्थनाएं धर्म से ऊपर उठकर मानवता को समर्पित होती हैं और प्रेमानंद महाराज ईश्वर का वरदान हैं।
नफरत के विरोध में मोहब्बत का पैगाम
अखलाक ने यह भी कहा कि:“दुआ मांगने वालों को धमकी देने वाले मानसिक रूप से बीमार हैं। हमें नफरत नहीं, मोहब्बत का पैगाम देना है। देश को जोड़ने के लिए प्रेमानंद महाराज जैसे संतों की आवश्यकता है।”
गंगा-जमुनी तहज़ीब का जीवंत उदाहरण
संत प्रेमानंद के लिए की गई दुआ सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं थी, बल्कि यह सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक एकता का एक सुंदर उदाहरण बन गई। जब एक दरगाह पर हिंदू संत के लिए मुस्लिम समुदाय ने दुआ की, तो यह साबित हो गया कि इंसानियत धर्म से बड़ी होती है।



