न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन हुए शंकराचार्य विवाद पर अब अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक डॉ. प्रवीण तोगड़िया की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज का आपस में बंटना ठीक संकेत नहीं है। यदि हिंदू एकजुट नहीं रहे तो इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आपसी संवाद के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की।
बुधवार को भदोही पहुंचे डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने एक स्वागत समारोह के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा कि मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज माघ मेले में जो घटनाक्रम हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी को सुझाव देने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन प्रार्थना करते हैं कि दोनों संत आपस में बैठकर समाधान निकालें और हिंदू एकता व सम्मान का मार्ग स्वयं तय करें।
तोगड़िया ने अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि हिंदू समाज इसी तरह आपस में टकराता रहा, तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित हमलों और मंदिरों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर भी चिंता जताई।
कैसे शुरू हुआ विवाद
गौरतलब है कि मौनी अमावस्या के दिन रविवार सुबह शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ संगम नोज पहुंचे थे। वे पालकी पर सवार थे, जबकि उनके शिष्य पैदल चल रहे थे। संगम तट पर पहले से बैरिकेडिंग लगी थी। प्रशासन की ओर से उन्हें पालकी पर बैठकर स्नान के लिए जाने से रोका गया और पैदल जाने का अनुरोध किया गया। संगम घाट की दूरी करीब 50 मीटर ही थी, लेकिन अनुयायियों ने इसका विरोध किया, जिससे धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
प्रशासन ने भी रखा अपना पक्ष
विवाद बढ़ने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्वयं के अपमान और शिष्यों के साथ कथित अभद्रता का आरोप लगाते हुए मेला प्रशासन के खिलाफ धरना दिया। सोमवार को जब उन्होंने मीडिया से बात की, तो पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपना पक्ष सामने रखा।
यह भी पढ़े:- टी20 वर्ल्ड कप से बाहर हो सकता है बांग्लादेश, ICC ने दी आखिरी चेतावनी, एक दिन की मोहलत
प्रशासन का कहना था कि शंकराचार्य को स्नान करने से नहीं रोका गया था, बल्कि केवल पहिया लगी पालकी पर आपत्ति जताई गई थी। उस समय संगम नोज पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद थी और पालकी के साथ घाट तक जाने से भगदड़ या किसी अप्रिय घटना की आशंका थी। इसी कारण सुरक्षा के लिहाज से पैदल जाने का अनुरोध किया गया था।
इस पूरे प्रकरण के बीच अब प्रवीण तोगड़िया के बयान से मामला और चर्चा में आ गया है, वहीं सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों पक्ष आपसी संवाद से विवाद को किस तरह सुलझाते हैं।



