न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। जानकारों का मानना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और लंबे समय से खुदरा कीमतों के स्थिर रहने के कारण जल्द ही आम लोगों को ईंधन महंगा होने का झटका लग सकता है।
क्यों बढ़ सकती हैं कीमतें?
रिपोर्ट्स के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें हाल ही में 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो करीब चार साल का उच्च स्तर है। हालांकि इसमें थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन कीमतें अभी भी 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं।
सूत्रों के अनुसार, बदलते हालात में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। लंबे समय से कीमतें स्थिर रहने के चलते सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय हालात का असर
तेल बाजार में अस्थिरता की बड़ी वजह मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है, और यहां आपूर्ति प्रभावित होने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है। साथ ही ईरान और अमेरिका के बीच तनाव भी स्थिति को और जटिल बना रहा है।
तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव
सूत्रों के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 10 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो रहा है। यही वजह है कि आने वाले समय में कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
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