सर्वोदय (अयोध्या):- अयोध्या जनपद के तारून ब्लॉक स्थित गंगातारा गांव में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन बड़े श्रद्धा भाव से किया गया। कथा वाचक आचार्य ज्ञान प्रकाश शास्त्री जी ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण की दिव्य लीला का भावविभोर कर देने वाला वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब संपूर्ण संसार पीड़ा और अन्याय के अंधकार में डूबा हुआ था, चारों ओर अधर्म का बोलबाला था और संत, पृथ्वी, गौ माता व ब्रह्मांड अपने-अपने धर्म का पालन करने में असमर्थ हो चुके थे, तब प्रभु ने इस धरती पर अवतरण का संकल्प लिया। रात्रि की उस घड़ी में जब तीन ही प्राणी जाग रहे थे – देवकी, वासुदेव और चंद्रमा – तभी भगवान श्रीकृष्ण ने अपने अद्भुत रूप में जन्म लिया। आचार्य जी ने बताया कि ईश्वर का साक्षात्कार वही कर सकता है जो कर्म और वासना से ऊपर उठ चुका हो।
उन्होंने श्रीमद्भागवत को समस्त ग्रंथों का सार बताया, जो न केवल मनुष्यों को, बल्कि प्रेत योनि में पड़ी आत्माओं को भी मुक्ति प्रदान करती है। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि भगवान ही जीवों के सच्चे और एकमात्र कल्याणकर्ता हैं।भागवत भक्ति प्रधान ग्रंथ है, जिसमें जाति, पंथ, देश और काल का कोई बंधन नहीं है – यहाँ केवल भाव और कर्म ही मुख्य हैं। कथा में अजामिल, गजेंद्र और गिद्ध जैसे पात्रों के प्रसंगों से यह शिक्षा मिलती है कि श्रद्धा और सच्चे भाव से ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में महिलाओं ने मंगल गीतों की गूंज से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।इस शुभ अवसर पर राजेश दुबे, सुनील दुबे, संदीप यादव, सुशील सिंह, प्रवीण सिंह और शशिकांत पांडेय जैसे गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



