Friday, May 8, 2026

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NCRB रिपोर्ट: यूपी में कम हुए महिला अपराध और दलित उत्पीड़न, छेड़छाड़ की घटनाएं 50% घटी

NCRB Report: यूपी की जिस बदली कानून-व्यवस्था की चर्चा दूसरे राज्यों में भी होती है, राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा ‘क्राइम इन इंडिया-2024’ रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर अहम आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध, अपहरण, दलित उत्पीड़न और कई संगीन अपराधों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के तीन वर्षीय तुलनात्मक आंकड़े यह संकेत देते हैं कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बेहतर हुई है। खास तौर पर दहेज हत्या, छेड़छाड़ और अपहरण जैसे मामलों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

दहेज हत्या के मामलों में 50% से ज्यादा कमी

NCRB रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश में दहेज हत्या के 2,122 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 1,047 रह गई। यानी इस अपराध में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई।

अगर 2022 के आंकड़ों से तुलना करें तो दहेज हत्या के मामलों में लगभग 51 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है।

दुष्कर्म और महिला हत्या के मामलों में भी गिरावट

रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में दुष्कर्म के मामलों में भी कमी आई है। वर्ष 2023 में जहां 3,516 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 3,209 रह गई। यानी 8.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। 2022 की तुलना में यह गिरावट लगभग 13 प्रतिशत रही।

महिलाओं की हत्या के मामलों में भी कमी आई है। 2023 में ऐसे 702 मामले सामने आए थे, जबकि 2024 में इनकी संख्या घटकर 668 रह गई।

छेड़छाड़ की घटनाएं आधी हुईं

महिलाओं से छेड़छाड़ के मामलों में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। 2023 में जहां 9,453 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 4,418 रह गई। यानी इस अपराध में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी आई।

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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि Anti Romeo Squad की सक्रियता और महिला पुलिसकर्मियों की बढ़ती संख्या इसका प्रमुख कारण है।

अपहरण के मामलों में 62.8% गिरावट

NCRB रिपोर्ट के मुताबिक अपहरण के मामलों में भी भारी कमी दर्ज की गई। 2023 में अपहरण के 14,272 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 5,306 रह गई।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, लगातार बढ़ी निगरानी, प्रभावी गश्त और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का असर इन आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।

डकैती, लूट और चोरी के मामलों में भी कमी

  • डकैती: 2023 में 73 मामले, 2024 में 57 — 21.9% कमी
  • लूट: 2023 में 1,354 मामले, 2024 में 1,163 — 14.1% कमी
  • चोरी: 2023 में 6,968 मामले, 2024 में 3,753 — 46.1% कमी

SC-ST अत्याचार के मामलों में भी गिरावट

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के खिलाफ अपराधों में भी कमी दर्ज की गई है। 2023 में ऐसे 15,130 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 14,642 रह गई।

SC-ST समुदाय से जुड़े हत्या के मामलों में 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। 2023 में 157 मामलों के मुकाबले 2024 में 146 मामले सामने आए। वहीं दुष्कर्म के मामले 645 से घटकर 575 रह गए।

घरेलू उत्पीड़न के मामलों में बढ़ोतरी

हालांकि रिपोर्ट में घरेलू उत्पीड़न के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। 2024 में ऐसे 21,266 मामले सामने आए, जो 2023 की तुलना में 6.9 प्रतिशत अधिक हैं।

कुल संज्ञेय अपराध लगभग स्थिर

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज कुल संज्ञेय अपराधों की संख्या लगभग स्थिर रही। 2023 में 4,28,794 मामलों के मुकाबले 2024 में 4,30,552 मामले दर्ज हुए, जो केवल 0.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाते हैं।

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