न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन के मौके पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है। लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर नई रणनीति का संकेत देते हुए “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के नारे को फिर से केंद्र में रखा। इस दौरान उन्होंने ब्राह्मण, क्षत्रिय और यादव समाज को साधने की खुली कोशिश की।
मायावती ने कहा कि यदि बसपा एक बार फिर सत्ता में आती है तो वर्ष 2007 की तरह सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रमुख वोट बैंक माने जाने वाले यादव समाज के कल्याण की भी बात कही।
ब्राह्मण-क्षत्रिय समाज को साधने की कोशिश
मायावती ने हाल ही में हुए शीतकालीन सत्र का जिक्र करते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज के जनप्रतिनिधियों ने उपेक्षा और उत्पीड़न को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी, कांग्रेस और सपा ब्राह्मण समाज को केवल दिखावटी आयोजनों से बहलाती हैं, जबकि वास्तविक सम्मान बसपा में ही मिलता है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि बसपा की सरकार बनने पर ब्राह्मण समाज की अपेक्षाएं पूरी होंगी और क्षत्रिय व वैश्य समाज के उत्थान के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएंगे।
ईवीएम पर फिर जताया अविश्वास
मायावती ने एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर सवाल खड़े किए और कहा कि उन्हें इस व्यवस्था पर भरोसा नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से 2027 के चुनाव की तैयारियों में पूरी ताकत झोंकने की अपील की।
इस अवसर पर उन्होंने अपनी आत्मकथा के 21वें संस्करण ‘ब्लू बुक’ का भी विमोचन किया और कहा कि यह पुस्तक पार्टी के संघर्ष और अनुभवों का दस्तावेज है, जो कार्यकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक बनेगी।
सपा के ‘PDA’ पर तीखा हमला
मायावती ने समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फार्मूले को दिखावा करार दिया। उन्होंने 1995 के गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए कहा कि सपा शासन में उन पर जानलेवा हमला कराया गया था।
यह भी पढ़े:- Aaj Ka Rashifal 15 January 2026: ग्रहों की चाल बताएगी आपका भविष्य, जानिए मेष से
उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान दलितों पर सबसे अधिक अत्याचार हुए और बसपा संस्थापक कांशीराम के निधन पर भी राजकीय शोक घोषित नहीं किया गया। मायावती ने यह भी कहा कि सपा केवल यादव समाज के एक सीमित वर्ग तक ही सिमट कर रह गई है।
जाट समाज और गन्ना किसानों को भी साधा
पश्चिमी यूपी पर नजर रखते हुए मायावती ने जाट समुदाय और गन्ना किसानों के हितों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के दौरान शिक्षित जाट युवाओं को पुलिस भर्ती में बड़े पैमाने पर अवसर दिए गए थे। सत्ता में लौटने पर जाट समाज और गन्ना किसानों के हितों को फिर प्राथमिकता दी जाएगी।
अन्य प्रमुख दावे
- मौजूदा सरकारों पर बसपा की पुरानी योजनाओं को नए नाम से लागू करने का आरोप
- दलितों और पिछड़ों के अधिकारों के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष का संकल्प
- दलित-पिछड़े महापुरुषों को स्मारक और प्रतिमाओं के जरिए सम्मान देने का दावा
कुल मिलाकर, जन्मदिन के मंच से मायावती ने साफ संकेत दिया कि 2027 के चुनाव में बसपा एक बार फिर सर्वजन राजनीति के सहारे मैदान में उतरने की तैयारी में है।



