सर्वोदय/राजनीति:- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को लोकसभा में पास हुए वक्फ संशोधन विधेयक पर बड़ा बयान दिया। ममता ने कहा कि जब भी भाजपा की सरकार सत्ता से बाहर होगी, उनकी सरकार इस वक्फ विधेयक को रद्द कर देगी। उन्होंने भाजपा पर देश को विभाजित करने का आरोप लगाया और इस बिल को धार्मिक आधार पर राजनीति करने का एक कदम करार दिया।
बीजेपी के वक्फ बिल पर ममता का हमला
ममता बनर्जी ने वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 के बारे में कहा, “बीजेपी ने इस विधेयक के माध्यम से देश को बांटने का काम किया है। जब भाजपा सरकार हटेगी और नई सरकार बनेगी, तो हम इस विधेयक को रद्द करने के लिए आवश्यक संशोधन करेंगे।” ममता ने इस बिल को लेकर भाजपा के इरादों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह विधेयक एक राजनीतिक चाल है जिसका उद्देश्य समाज को धार्मिक रूप से बांटना है।
तृणमूल कांग्रेस ने किया विधेयक का विरोध
वक्फ संशोधन विधेयक पर संसद में हुई बहस के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने इस विधेयक का विरोध किया। उन्होंने इसे राज्यों के अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि संसद को इस तरह के विधेयक लाने का अधिकार नहीं है। बनर्जी ने कहा, “वक्फ संपत्ति मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है, और इसे इस तरह से नियंत्रित करने का अधिकार केवल राज्यों का है।”
उन्होंने विधेयक को असंवैधानिक करार देते हुए यह भी कहा कि यह उच्चतम न्यायालय और अन्य न्यायालयों द्वारा स्थापित सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। उनका आरोप था कि सरकार इस विधेयक के जरिए राज्यों की अधिकारों पर अतिक्रमण करने की कोशिश कर रही है।
लोकसभा में विधेयक की मंजूरी, राज्यसभा में जारी है बहस
मंगलवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पेश किया। इसके बाद, 12 घंटे तक चली बहस के बाद एनडीए के सांसदों ने विधेयक का समर्थन किया और यह विधेयक 288 वोटों के साथ पारित हो गया। वहीं, 232 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट डाले। इसके बाद, यह विधेयक गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया, जहां पर इस पर चर्चा जारी है।
विधेयक का उद्देश्य और विपक्ष की चिंताएं
वक्फ संशोधन विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाना और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। इस विधेयक के तहत, वक्फ बोर्डों की कार्यप्रणाली में सुधार और तकनीकी उन्नति की बात की जा रही है। हालांकि, विपक्षी दलों का कहना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के अधिक नियंत्रण को केंद्र सरकार के हाथों में सौंपने का एक प्रयास है, जो संविधान की भावना के खिलाफ है।
ममता बनर्जी का यह बयान वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ विपक्षी दलों की एकजुटता को और मजबूत करता है। उन्होंने इस विधेयक को न केवल असंवैधानिक बताया, बल्कि इसे सत्ता की राजनीतिक चाल करार देते हुए इसे रद्द करने का भी वादा किया। अब देखना होगा कि राज्यसभा में इस विधेयक का क्या परिणाम आता है और क्या विपक्षी दल इस मुद्दे पर और कड़ा विरोध जारी रखते हैं।



