न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर संगम स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच टकराव गहराता चला गया। संगम स्नान से रोके जाने के बाद नाराज शंकराचार्य ने समर्थकों के साथ धरना शुरू कर दिया, जो देर रात तक चलता रहा। सूर्यास्त के बाद उन्होंने मौन व्रत के साथ अनशन भी शुरू कर दिया, जो फिलहाल जारी है। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि उनके साथ जानबूझकर बदसलूकी की गई और भगदड़ कराकर उन्हें नुकसान पहुंचाने की साजिश रची गई।
संगम स्नान को लेकर बढ़ा विवाद
रविवार सुबह करीब 9:47 बजे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी पर सवार होकर अपने अनुयायियों के साथ संगम नोज पहुंचे। संगम तट पर पहले से बैरिकेडिंग लगी थी। प्रशासन ने यह कहते हुए उन्हें रोक दिया कि पालकी पर बैठकर स्नान की अनुमति नहीं है और पैदल जाकर स्नान करने का आग्रह किया गया। संगम घाट की दूरी मात्र करीब 50 मीटर थी, लेकिन इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया।
शंकराचार्य के अनुयायियों ने इसका विरोध किया और धक्का-मुक्की के बीच संगम वॉच टावर तक पहुंच गए। स्थिति बिगड़ती देख मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार को भीड़ को देखते हुए पालकी आगे न बढ़ने देने के निर्देश दिए।
पुलिस और समर्थकों में झड़प
पुलिस अधिकारियों ने शंकराचार्य और उनके अनुयायियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बन सकी। करीब तीन घंटे तक संगम तट पर हो-हल्ला और खींचतान चलती रही। इस दौरान कुछ अनुयायियों को पुलिस ने संगम चौकी के भीतर ले जाकर रोके रखा। मौके पर डीएम मनीष कुमार वर्मा और मेलाधिकारी ऋषिराज भी पहुंचे, लेकिन पैदल स्नान के सुझाव पर सहमति नहीं बन पाई।
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आरोप है कि इस दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच कई बार धक्का-मुक्की हुई और शंकराचार्य के शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि सहित कई संतों के साथ मारपीट की गई। कुछ संतों को बाल पकड़कर घसीटे जाने के भी आरोप लगाए गए। दोपहर करीब 12:15 बजे तक स्थिति यह हो गई कि शंकराचार्य पालकी पर अकेले रह गए, जिसके बाद कुछ लोगों ने पालकी को वहां से हटाया।
बिना स्नान लौटे शंकराचार्य
लगातार गतिरोध के बाद शंकराचार्य बिना संगम स्नान किए लौट गए। उन्होंने कहा कि जब तक बदसलूकी करने वाले अधिकारी उन्हें सम्मानपूर्वक स्नान के लिए नहीं ले जाएंगे, तब तक वह स्नान नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो वह मेला छोड़ सकते हैं।
छत्र टूटने का आरोप, शिविर के बाहर धरना
शंकराचार्य की पालकी को अक्षयवट मार्ग पर छोड़ दिया गया, जहां कथित तौर पर उनका छत्र टूट गया। इसे लेकर समर्थकों में भारी नाराजगी देखी गई। आरोप है कि करीब आधे घंटे तक शंकराचार्य वहां अकेले खड़े रहे। बाद में समर्थक पहुंचे और उन्हें त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर तक ले गए, जहां उन्होंने धरना शुरू किया।
प्रशासन का पक्ष
मंडलायुक्त का कहना है कि अमावस्या के कारण संगम क्षेत्र को नो-व्हीकल जोन घोषित किया गया था। उनके अनुसार, बिना अनुमति पालकी पर सवार होकर करीब 200 अनुयायियों के साथ संगम पहुंचना परंपरा और नियमों के विपरीत था। भीड़ अत्यधिक थी और बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने से जनसामान्य को परेशानी हुई, जिससे किसी भी तरह की अप्रिय घटना की आशंका बन गई थी।
बैरियर तोड़ने को लेकर जांच
पुलिस आयुक्त ने दावा किया कि शंकराचार्य के समर्थकों ने पांटून पुल नंबर दो का बैरियर तोड़ा है। हालांकि समर्थकों ने इस आरोप से इनकार किया है। पुलिस अब सुबह 9:30 बजे की फुटेज के जरिए इसकी पुष्टि करने की बात कह रही है।
फिलहाल, पूरे घटनाक्रम को लेकर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और शंकराचार्य का अनशन जारी है।



