लाइफस्टाइल/सर्वोदय न्यूज़:- आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग घंटों ऑफिस की कुर्सी पर बैठे रहते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार एक ही जगह बैठे रहना सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। यह आदत न सिर्फ रीढ़ की हड्डी को कमजोर करती है, बल्कि शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी धीमा कर देती है।
डॉक्टरों का मानना है कि फिट रहने के लिए केवल जिम जाना ही काफी नहीं है, बल्कि दिनभर लगातार बैठे रहने की आदत से बचना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
एक्सपर्ट्स की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर की मांसपेशियों, हड्डियों और रक्त संचार को सही ढंग से काम करने के लिए नियमित गतिविधि जरूरी होती है। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहने से शरीर के इन हिस्सों पर दबाव पड़ता है, जिससे धीरे-धीरे कई शारीरिक समस्याएं जन्म लेने लगती हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कि दिनभर में कितनी बार कुर्सी से उठना चाहिए।
क्या है ‘30-30 नियम’?
विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही कुर्सी से उठने की कोई तय संख्या न हो, लेकिन एक व्यावहारिक नियम है ‘30-30 नियम’। इसके तहत हर 30 मिनट में कम से कम एक बार कुर्सी से उठना चाहिए।
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मतलब, एक सामान्य ऑफिस टाइम में कम से कम 8 से 10 बार खड़े होना, चलना या स्ट्रेचिंग करना फायदेमंद माना जाता है। सिर्फ 1–2 मिनट की हल्की वॉक या स्ट्रेचिंग भी रक्त संचार को बेहतर बनाती है और मांसपेशियों की जकड़न को कम करती है।
लगातार बैठे रहने से हो सकती हैं ये समस्याएं
लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर की मेटाबोलिक रेट प्रभावित होती है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है, जैसे—
- वजन बढ़ना
- पीठ और गर्दन दर्द
- घुटनों में अकड़न
- गलत पोस्चर
- ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव
- कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना
- हृदय रोग और मधुमेह का खतरा
कुर्सी से उठकर क्या करें?
हर बार कुर्सी से उठने पर भारी एक्सरसाइज करना जरूरी नहीं है।आप कुछ आसान गतिविधियां भी कर सकते हैं, जैसे –
- हल्की स्ट्रेचिंग
- पानी पीने जाना
- टॉयलेट ब्रेक लेना
- कुछ कदम चलना
ये छोटी-छोटी गतिविधियां शरीर को निष्क्रिय अवस्था से सक्रिय अवस्था में लाने में मदद करती हैं।
डॉक्टरों की सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि हमारी दैनिक आदतें ही हमारे स्वास्थ्य की नींव रखती हैं। थोड़ी-थोड़ी देर में उठकर चलना एक आसान लेकिन बेहद असरदार तरीका है, जो लंबे समय तक आपको स्वस्थ, ऊर्जावान और फ्रेश रख सकता है। शरीर के संकेतों को समझें और उन्हें नजरअंदाज न करें, क्योंकि अच्छी सेहत छोटी आदतों से ही बनती है।



