न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्षत्रिय समाज के सबसे बड़े नेता को लेकर छिड़ी बहस के बीच बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का कड़ा बयान सामने आया है। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया और पोस्टरों के जरिए तुलना किए जाने से बृजभूषण शरण सिंह खासे नाराज़ नजर आए और उन्होंने दो टूक शब्दों में अपनी बात रखी।
गोंडा जिले की कैसरगंज लोकसभा सीट से पूर्व सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अगर किसी को राजा भैया का इतिहास जानना है, तो पहले उनके पिता महाराज उदय प्रताप सिंह के जीवन और संघर्ष को समझना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उदय प्रताप सिंह उनके लिए आदर्श हैं और क्षत्रिय समाज में उनका विशेष स्थान रहा है।
पोस्टर विवाद पर भड़के बृजभूषण
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि एक पोस्टर के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई कि क्षत्रिय समाज का बड़ा नेता कौन है, जिससे उन्हें आपत्ति हुई। उन्होंने कहा, “मैं पहले भी कह चुका हूं—जाकी रही भावना जैसी, हरि मूरत देखी तिन तैसी। राष्ट्र कथा को जिस नजर से देखा जाएगा, वही अर्थ निकलेगा। यह कथा समाज को जोड़ने के लिए थी, न कि विभाजन के लिए।”
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उन्होंने यह भी साफ किया कि राजा भैया उनके छोटे भाई की तरह हैं। उम्र में छोटे होने के साथ-साथ राजा भैया उनके बेटों के मित्र भी हैं, ऐसे में इस तरह की तुलना और बयानबाजी को अनावश्यक बताया।
उदय प्रताप सिंह को बताया संघर्ष का प्रतीक
पूर्व सांसद ने कहा कि महाराज उदय प्रताप सिंह संघर्ष और सिद्धांतों के प्रतीक रहे हैं। “हम उन्हें अपना आदर्श मानते हैं और राजा भैया उनके ही सुपुत्र हैं,” बृजभूषण शरण सिंह ने कहा। साथ ही उन्होंने समाज में भ्रम फैलाने वाली चर्चाओं को रोकने की अपील भी की।
जन्मदिन पर राष्ट्र कथा महोत्सव का समापन
गौरतलब है कि सरयू तट स्थित नंदिनी निकेतन में 1 जनवरी से चल रहे राष्ट्र कथा महोत्सव का समापन बृजभूषण शरण सिंह के जन्मदिन के अवसर पर पूरे विधि-विधान के साथ हुआ। कथा का वाचन सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने किया।
पूर्व सांसद के जन्मदिन पर भव्य जुलूस भी निकाला गया, जिसमें सैकड़ों गाड़ियां शामिल रहीं। खुली जीप में सवार बृजभूषण शरण सिंह पर जगह-जगह फूलों की वर्षा की गई। इस दौरान संतों का आशीर्वाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कथा महोत्सव लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे।



