सर्वोदय/कानपुर:– यूपी पुलिस पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब कानपुर पुलिस ने एक और विवाद को जन्म दे दिया है। बाराबंकी के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी के 80 वर्षीय पिता एसएन त्रिपाठी का शांतिभंग करने के आरोप में चालान कर दिया गया है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।
एसएन त्रिपाठी, जो एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और कानपुर के कल्याणपुर इलाके में रहते हैं, का कहना है कि पुलिस ने उन्हें झूठे मामले में फंसाया है। उनका आरोप है कि जिस समय मंदिर विवाद हुआ, वह मौके पर मौजूद ही नहीं थे, बावजूद इसके पुलिस ने बिना किसी ठोस साक्ष्य के उन्हें शांतिभंग की धारा 151 के तहत नामजद करते हुए चालान काट दिया।
त्रिपाठी ने बताया कि मंदिर में दो समितियों के बीच फरवरी में दानपात्र खोलने को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस ने एक पक्ष की बात मानते हुए रिपोर्ट दर्ज की और उनके नाम को जबरन जोड़ दिया गया। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की है ताकि उनकी बेगुनाही साबित हो सके।
पुलिस कार्रवाई से त्रिपाठी परिवार गहरे सदमे में है। एसएन त्रिपाठी ने इसे अपने आत्मसम्मान पर गहरी चोट बताया है और कहा कि उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं, ठोस न्याय नहीं।
इस पूरे मामले पर कल्याणपुर के एसीपी अभिषेक पांडे का कहना है कि यदि किसी का नाम गलती से रिपोर्ट में जोड़ा गया है तो इसकी जांच की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनी हुई है।
यह मामला यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर रहा है, खासकर तब जब आरोपी एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का परिवार है। अब देखना होगा कि इस विवाद पर सरकार और पुलिस विभाग क्या रुख अपनाते हैं।



