एंटरटेनमेंट डेस्क/सर्वोदय न्यूज़ :- बहुप्रतीक्षित पौराणिक फिल्म ‘कन्नप्पा’ (Kannappa) आखिरकार आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। भगवान शिव के अनन्य भक्त कन्नप्पा की कहानी पर आधारित इस फिल्म को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला। तेलुगु भाषा में बनी इस डिवोशनल माइथोलॉजिकल ड्रामा को मुकेश कुमार सिंह ने निर्देशित किया है, जबकि इसके लेखक और मुख्य अभिनेता विष्णु मांचू हैं।
फिल्म की कहानी आदिवासी युवक थिनाडू (विष्णु मांचू) की है, जो बचपन में नास्तिक होता है, लेकिन परिस्थितियां उसे भगवान शिव का परम भक्त कन्नप्पा बना देती हैं। कहानी श्री कालहस्ती मंदिर की पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसमें प्रेम, विद्रोह, आत्मबलिदान और आस्था की गहराई को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया है।
फिल्म में एक से बढ़कर एक दिग्गज कलाकार नजर आते हैं जिनमे अक्षय कुमार शिव के रूप में दमदार और प्रभावशाली हैं, काजल अग्रवाल पार्वती के रूप में खूबसूरत लगीं, प्रभास रुद्र के रूप में सीमित लेकिन शानदार उपस्थिति दर्ज कराते हैं, मोहनलाल, मोहन बाबू, आर. शरत कुमार, ब्रह्मानंदम, प्रीति मुकुंदन जैसे कलाकारों की भूमिकाएं छोटी लेकिन अहम हैं | विष्णु मांचू का अभिनय अच्छा है, लेकिन फिल्म की शुरुआत में उनकी पकड़ थोड़ी कमजोर लगती है। वहीं, युवा थिनाडू के रूप में उनके बेटे की डबिंग निराश करती है।
फिल्म की असली जान इसके अंतिम 40 मिनट में है, खासकर भावनात्मक क्लाइमैक्स के दौरान जो सभी दर्शकों को प्रभावित करने में सक्षम है. रुद्र (प्रभास) का प्री-क्लाइमैक्स हिस्सा अच्छी तरह से संभाला गया है. हालांकि, फिल्म का बाकी हिस्सा कई बार बिखरा हुआ लगता है, जिसमें दर्शक खुद को जोड़ नहीं पाते. फिल्म का पहला भाग काफी स्लो है, जिससे थोड़ी बोरियत भी महसूस होती है. हालांकि सेकंड पार्ट आते-आते फिल्म अपनी गति पकड़ लेती है और क्लाइमैक्स तक आपको बांधे रखती है|



