न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने आज भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश (Chief Justice of India, CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें सोमवार को पद की शपथ दिलाई। वे जस्टिस बी. आर. गवई की जगह ले रहे हैं, जिनका एक दिन पहले कार्यकाल समाप्त हो गया था।
महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि और नामांकन
- जस्टिस सूर्यकांत को 30 अक्टूबर 2025 को अगले प्रधान न्यायाधीश के रूप में नामित किया गया था।
- उनका कार्यकाल लगभग 15 महीने का होगा। वे 9 फरवरी 2027 को 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त होंगे।
- वे हरियाणा के हिसार जिले में जन्मे और मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से हैं। छोटे शहर के वकील से यह यात्रा उन्हें देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक ले आई है।
- उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर की डिग्री ‘प्रथम श्रेणी में प्रथम’ स्थान के साथ प्राप्त की है।
कुछ चर्चित फैसले और भूमिका
जस्टिस सूर्यकांत कई संवैधानिक और राष्ट्रीय-महत्व के मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उनके कुछ उल्लेखनीय निर्णय और योगदान निम्नलिखित हैं:
-
अनुच्छेद 370 (जम्मू-कश्मीर)
वे उस पीठ का हिस्सा थे जिसने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने वाले फैसले को संभाला, जो राष्ट्रीय स्तर पर तीव्र चर्चा में था। -
बिहार मतदाता सूची का पुनरीक्षण
जस्टिस सूर्यकांत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि बिहार में मसौदा मतदाता सूची (Draft Voter List) में शामिल किए जाने वाले करीब 65 लाख मतदाताओं की जानकारी सार्वजनिक की जाए। उन्होंने यह कदम चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ाने और लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए उठाया था। -
लैंगिक न्याय और पंचायत सरपंच बहाली
एक मामले में उन्होंने गैरकानूनी तरीके से हटाई गई महिला सरपंच को पुनः बहाल किया और लैंगिक पूर्वाग्रह (gender bias) के मुद्दों को उजागर किया। यह फैसला लोकतंत्र और महिलाओं के अधिकारों के लिए विशेष महत्व रखता है। -
बार एसोसिएशन में महिलाओं के लिए आरक्षण
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन समेत अन्य बार एसोसिएशन में एक-तिहाई (1/3) सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया, जो न्याय क्षेत्र में लैंगिक समता की दिशा में एक बड़ा कदम था। -
ओआरओपी (One Rank – One Pension)
उन्होंने सशस्त्र बलों के “वन रैंक-वन पेंशन” (OROP) योजना को संवैधानिक वैधता दी। इसके अलावा, महिला अधिकारियों की याचिकाओं पर सुनवाई की, जिन्होंने स्थायी कमीशन में समानता की मांग की थी। -
पेगासस स्पाइवेयर जांच
जस्टिस सूर्यकांत उस संवेदनशील पीठ का हिस्सा थे जिसने कथित इजराइली स्पाइवेयर “पेगासस” के उपयोग की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों की समिति गठित की। यह मामला निजता, निगरानी और नागरिक स्वतंत्रता के सवालों पर केंद्रित था। -
पंजाब सुरक्षा चूक की जांच
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान हुई सुरक्षा चूक की घटना की जांच हेतु प्रधान न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में पांच-सदस्यीय समिति गठित करने में भूमिका निभाई।



