लखनऊ/सर्वोदय : अंडा खाने वालों के बीच यह सवाल लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है – क्या अंडा शाकाहारी (वेज) है या मांसाहारी (नॉन-वेज)? जहां कुछ लोग इसे पोषण से भरपूर शाकाहारी विकल्प मानते हैं, वहीं कई इसे जीव-उत्पत्ति के कारण नॉन-वेज मानकर इससे परहेज़ करते हैं। इस बहस ने रसोई से लेकर धार्मिक और सांस्कृतिक मंचों तक जगह बना ली है। अब वैज्ञानिकों ने इस उलझन का स्पष्ट और तार्किक जवाब दिया है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: अंडा है नॉन-वेज
वैज्ञानिकों के अनुसार, अंडा मुर्गी का प्रजनन उत्पाद है। यह एक भ्रूण होता है, जो अगर निषेचित हो तो चूजे में परिवर्तित हो सकता है। हालांकि, बाजार में जो अंडे बिकते हैं वे ज़्यादातर निषेचित नहीं होते, यानी उनसे चूजा नहीं निकल सकता। बावजूद इसके, वैज्ञानिक रूप से अंडा नॉन-वेज ही माना जाता है, क्योंकि यह एक जीव से उत्पन्न होता है।
हालांकि, अंडे में मांस या रक्त जैसा कोई तत्व नहीं होता। इसी वजह से कुछ लोग इसे “सदृश शाकाहारी” (Eggitarian) मानते हैं और अपने आहार में शामिल करते हैं।
सांस्कृतिक और धार्मिक नजरिया
भारत में खान-पान से जुड़ी मान्यताएं धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई हैं। जैन, वैष्णव, और कई अन्य समुदाय अंडे को पूरी तरह से नकारते हैं। वहीं, कई लोग इसे प्रोटीन का सस्ता और पौष्टिक स्रोत मानते हुए इसे नियमित आहार में शामिल करते हैं।
पश्चिमी देशों में, विशेषकर शाकाहारी संस्कृति में, निषेचित न होने की स्थिति में अंडे को वेज माना जाता है। यह सांस्कृतिक भिन्नता ही इस बहस की सबसे बड़ी वजह है।
पोषण के लिहाज से अंडा सुपरफूड
भले ही अंडा वेज है या नॉन-वेज, इससे इतर यह एक पोषण से भरपूर आहार है। अंडा प्रोटीन, विटामिन डी, बी12, और आवश्यक फैटी एसिड का बेहतरीन स्रोत है। यह आसानी से पकने वाला और किफायती भी है, इसलिए भारत में कुपोषण से लड़ने के लिए इसे स्कूलों के मिड-डे मील में शामिल करने की मांग तेज हो रही है।
क्यों हमेशा चर्चा में रहता है यह सवाल?
अंडे को लेकर बहस केवल पोषण या वैज्ञानिक दृष्टिकोण तक सीमित नहीं है। यह व्यक्तिगत पसंद, धार्मिक मान्यताओं, और सामाजिक विचारों का भी विषय बन चुका है। सोशल मीडिया पर “अंडा वेज है या नॉन-वेज?” को लेकर मीम्स और चर्चाएं आम हैं। रेस्तरां में “शुद्ध शाकाहारी” मेन्यू में अंडे की उपस्थिति भी कई बार विवाद खड़ा कर देती है।
विज्ञान साफ है, पर मान्यता अलग-अलग
वैज्ञानिक रूप से अंडा नॉन-वेज है, लेकिन सामाजिक, धार्मिक और व्यक्तिगत मान्यताओं के चलते इसका वर्गीकरण हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। यह बहस आने वाले समय में भी लोगों के लिए उतनी ही दिलचस्प बनी रहेगी, जितनी आज है।



