न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- यह कहानी है हिम्मत, जज्बा और प्रेरणा की। आईपीएस पूनम दलाल ने साबित किया कि मातृत्व और करियर दोनों को एक साथ संभाला जा सकता है।
पूनम दलाल ने यह दिखा दिया कि अगर मन में ठान लिया जाए, तो कोई भी शारीरिक चुनौती या पारिवारिक जिम्मेदारी आपके सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती।
9 महीने की प्रेग्नेंसी में UPSC प्रीलिम्स
पूनम दलाल का सपना था UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE) पास करना और एक बेहतर रैंक हासिल करना। जब यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा की तारीख आई, तब पूनम नौ महीने की गर्भवती थीं।
इतनी मुश्किल स्थिति में भी उन्होंने हार नहीं मानी और परीक्षा हॉल में बैठकर अपनी परीक्षा दी। दर्द और बेचैनी के बावजूद उन्होंने प्रीलिम्स सफलतापूर्वक पास किया।
3 महीने के बच्चे के साथ मेंस और इंटरव्यू
मेंस की परीक्षा के समय पूनम की 3 महीने की बेटी थी। रातभर जागना और बच्चे की देखभाल, लंबी-लंबी पढ़ाई और मेंस की परीक्षा| इन सबके बीच पूनम ने बेहतरीन तालमेल दिखाया।
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उनके परिवार और पति का सहयोग उनके लिए बेहद मददगार साबित हुआ। उन्होंने साबित कर दिया कि सही सपोर्ट और खुद पर विश्वास होने पर कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती।
सफलता और प्रेरणा
पूनम पहले भी दिल्ली पुलिस में नौकरी कर चुकी थीं और यूपीएससी में एक बार छोटी रैंक भी हासिल की थी। उन्होंने अपनी आखिरी कोशिश में UPSC 2015 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 308 हासिल की और IPS बनीं।
IPS पूनम दलाल की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए मिसाल है जो मानती हैं कि मातृत्व या जिम्मेदारियां करियर में रुकावट बन सकती हैं। यह सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और मेहनत की जीत की कहानी है।



