छपरा (बिहार)/ सर्वोदय न्यूज़:- आज के दौर में जब रिश्ते और जिम्मेदारियाँ बोझ बनते जा रहे हैं, बिहार के एक बेटे ने वो कर दिखाया जो किसी मिसाल से कम नहीं। अपने माता-पिता की अंतिम ख्वाहिश को पूरा करने के लिए इस बेटे ने करीब 10 करोड़ रुपये खर्च कर एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया है। यह मंदिर अब आस्था, समर्पण और संस्कार का प्रतीक बन गया है।
बिहार के छपरा ज़िले के नैनी गाँव में स्थित यह मंदिर अब श्रद्धालुओं के बीच एक बड़ा तीर्थ स्थल बन चुका है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे न तो किसी ट्रस्ट ने बनाया और न ही किसी संस्था ने फंडिंग की — यह पूरा निर्माण सिर्फ एक बेटे, राजीव सिंह ने अपनी मां और पिता की स्मृति में करवाया।
इस मंदिर की निर्माण शैली भी उतनी ही अद्भुत है। इसमें सीमेंट, रेत या लोहा का कोई प्रयोग नहीं किया गया। मंदिर पूरी तरह से आगरा, राजस्थान और केरल से लाए गए खास पत्थरों से निर्मित है। यह मंदिर भारत की प्राचीन शिल्पकला और वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है। इस मंदिर में श्रद्धालु पाँच प्रमुख देवताओं के दर्शन कर सकते हैं जिनमे भगवान द्वारकाधीश (श्रीकृष्ण), माँ दुर्गा, भगवान गणेश, भगवान शिव, श्री हनुमान जी है | हर दिन यहाँ न सिर्फ बिहार बल्कि उत्तर प्रदेश, झारखंड और दूर-दराज के राज्यों से भक्त आने लगे हैं।
मंदिर के पुजारी मनीष कुमार मिश्रा के अनुसार, यह सपना राजीव सिंह के माता-पिता का था, जिन्होंने इसकी नींव रखी थी। लेकिन दुर्भाग्यवश मंदिर निर्माण शुरू होते ही दोनों का निधन हो गया। इसके बाद बेटे राजीव सिंह ने प्रण लिया कि वह इस मंदिर को हर हाल में पूरा करेंगे।राजीव सिंह वर्तमान में गुजरात में सफल व्यवसायी हैं और उनका परिवार वहीं रहता है, लेकिन उन्होंने अपने गांव में वह किया, जिसे लोग पीढ़ियों तक याद रखेंगे।
इस मंदिर की कहानी सिर्फ आस्था की नहीं, बल्कि यह परिवार, संस्कार और समर्पण की मिसाल है। एक बेटे का यह कार्य बताता है कि अगर दिल में सच्ची भावना हो, तो कोई भी कार्य असंभव नहीं।



