Wednesday, February 25, 2026

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घर में पूजा और मंदिर की पूजा में क्या होता है अंतर? जानिये प्रेमानंद महाराज ने क्या बताया

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- हर घर में पूजा स्थल को बेहद पवित्र माना जाता है। आजकल अधिकांश लोग अपने घरों में अलग से पूजा कक्ष बनवाते हैं और नियमित रूप से देवी-देवताओं की आराधना करते हैं। कई लोगों का मानना है कि घर में की गई पूजा से ही ईश्वर प्रसन्न हो जाते हैं, इसलिए मंदिर जाना आवश्यक नहीं है। इसी विषय को लेकर एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से सवाल किया कि घर में पूजा और मंदिर या तीर्थ स्थल में की गई पूजा में क्या अंतर होता है? आइए जानते हैं महाराज जी का उत्तर।

घर की पूजा और मंदिर की पूजा अलग-अलग फल देती है

इस प्रश्न के उत्तर में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि घर में की गई पूजा और मंदिर, तीर्थ या धाम में की गई पूजा के फल समान नहीं होते। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूजा का स्थान भी उसके फल को निर्धारित करता है।

महाराज जी ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति घर में रहकर 1000 माला जप करता है, वही व्यक्ति यदि गौशाला में 100 माला और देवालय में केवल एक माला जप करता है, तो देवालय में किया गया एक माला जप, घर में किए गए 1000 माला जप के बराबर फल देता है।

धामों में भजन का विशेष महत्व

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि यदि कोई भक्त वृंदावन धाम जैसे पवित्र स्थान पर जप करता है, तो वहां की गई एक माला, एक लाख माला के बराबर फल प्रदान करती है।

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इससे यह स्पष्ट होता है कि घर का भजन और तीर्थ या धाम में किया गया भजन अलग-अलग प्रभाव रखता है।

भगवत प्राप्ति की इच्छा तीर्थ यात्रा से जुड़ी

महाराज जी के अनुसार, जब मन में भगवान की प्राप्ति की तीव्र इच्छा जागृत होती है, तभी व्यक्ति तीर्थ यात्रा करता है, संतों के सान्निध्य में जाता है और बड़े देवालयों के दर्शन करता है। ऐसे स्थानों पर जाने से मन और हृदय अधिक पवित्र होता है।

गंगा तट पर भजन का अलग ही प्रभाव

उन्होंने कहा कि घर में भजन करना और गंगा तट पर भजन करना एक समान नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति गंगा जल के समीप या उसमें बैठकर भजन करता है, तो उसका पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। यह सब भजन की विभिन्न पद्धतियां हैं, जिनका अपना-अपना आध्यात्मिक महत्व है।

तीर्थों में पूजा का विशेष लाभ

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि तीर्थों, धामों और पवित्र स्थलों में की गई पूजा और भजन का फल, घर की पूजा की तुलना में कई गुना अधिक होता है। यही कारण है कि शास्त्रों में तीर्थ यात्रा को विशेष महत्व दिया गया है।

डिस्क्लेमर:
इस लेख में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और संतों के प्रवचनों पर आधारित हैं। हम इनकी पूर्ण सत्यता का दावा नहीं करते। किसी भी धार्मिक या आध्यात्मिक निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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